बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों के लिए जारी केंद्रीय भर्ती प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की पूर्व सेवाओं को नियुक्ति प्रक्रिया में समुचित महत्व दिया जाए और उनके अनुभव के लिए यथोचित अंक (वेटेज) प्रदान कर नियुक्ति पर विचार किया जाए।
यह भर्ती प्रक्रिया नेशनल एजुकेशन सोसायटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) द्वारा संचालित की जा रही है।
छह वर्ष से अधिक सेवा का लिया संज्ञान
प्रकरण में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता वर्ष 2016 से 2024 के बीच छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थित EMRS विद्यालयों में पीजीटी एवं टीजीटी के रूप में कार्यरत रहे हैं।
सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद ने फैसला सुनाया। न्यायालय ने माना कि अनेक याचिकाकर्ताओं ने छह वर्ष से अधिक समय तक दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में निष्ठापूर्वक शिक्षण कार्य किया है तथा विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नियमितीकरण का अधिकार नहीं, पर सेवा की अनदेखी भी नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्थायी अथवा अतिथि सेवा के आधार पर नियमितीकरण का कोई स्वचालित या वैधानिक अधिकार उत्पन्न नहीं होता। हालांकि न्याय, समानता और प्रशासनिक निष्पक्षता के सिद्धांतों के तहत उनकी दीर्घकालीन सेवा को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
NESTS और राज्य सरकार को निर्देश
न्यायालय ने निर्देश दिया कि NESTS तथा राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ताओं की पूर्व सेवाओं को ध्यान में रखते हुए अनुभव के आधार पर उपयुक्त अंक/वेटेज प्रदान करें। पात्रता की शर्तें पूर्ण करने पर उनकी नियुक्ति पर विचार किया जाए।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि वर्षों तक की गई सेवा को व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता और उसका प्रभावी मूल्यांकन आवश्यक है।
साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह आदेश स्वतः नियमितीकरण या प्रत्यक्ष नियुक्ति का निर्देश नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बनाने के उद्देश्य से दिया गया है, ताकि पूर्व में सेवाएं दे चुके शिक्षकों को उनके अनुभव का वास्तविक लाभ मिल सके।





