बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा एक महिला आवेदक की ग्रामीण पेट्रोल पंप डीलरशिप का आशय पत्र (Letter of Intent-LOI) रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। हालांकि, कंपनी की लापरवाही और समय पर जांच नहीं करने के कारण महिला को हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति को देखते हुए कोर्ट ने HPCL को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
मामले के अनुसार, HPCL ने 14 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। याचिकाकर्ता अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर रोड स्थित ग्राम नवागांव की जमीन का प्रस्ताव देकर आवेदन किया था। दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद कंपनी ने 29 दिसंबर 2020 को उनके पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी कर दिया।
महिला ने लोन लेकर शुरू कर दिया था निर्माण कार्य
आशय पत्र मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा राशि के रूप में 5 लाख रुपये और 3.60 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट जमा किए। इसके अलावा जिला प्रशासन से एनओसी प्राप्त की, जमीन का सीमांकन कराया, बैंक से ऋण लेकर पेट्रोल पंप का निर्माण शुरू कराया और बिजली का ट्रांसफार्मर भी स्थापित करवा दिया।
पेट्रोल पंप शुरू होने से पहले रद्द कर दिया अनुबंध
जब पेट्रोल पंप शुरू होने की तैयारी पूरी हो चुकी थी, तब HPCL ने 31 दिसंबर 2021 को नोटिस जारी कर बताया कि प्रस्तावित जमीन स्टेट हाईवे-16 पर स्थित है। महिला ने जवाब में दावा किया कि जमीन ग्रामीण क्षेत्र में आती है, लेकिन कंपनी ने स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया और 1 फरवरी 2022 को लेटर ऑफ इंटेंट रद्द कर सुरक्षा राशि वापस कर दी। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए फैसला सुनाया
सुनवाई के दौरान HPCL ने कोर्ट को बताया कि डीलर सिलेक्शन गाइडलाइंस के अनुसार ग्रामीण श्रेणी के पेट्रोल पंप राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे या नगर पालिका क्षेत्र में स्थापित नहीं किए जा सकते। जांच में संबंधित जमीन स्टेट हाईवे-16 पर पाई गई, इसलिए डीलरशिप रद्द करना नियमों के अनुरूप था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियमों के विरुद्ध जाकर पेट्रोल पंप की डीलरशिप बहाल नहीं की जा सकती, इसलिए HPCL का फैसला वैध है। हालांकि, प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक जांच पूरी किए बिना आशय पत्र जारी करने और बाद में उसे रद्द करने से महिला को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी हुई। इसे कंपनी की लापरवाही मानते हुए कोर्ट ने HPCL को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।





