July 31, 2026

लिव-इन संबंध में शादी से इनकार मात्र से नहीं बनता दुष्कर्म का मामला, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

बिलासपुर। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि लंबे समय तक चले लिव-इन संबंध और दोनों पक्षों के आचरण से संबंध सहमति पर आधारित प्रतीत होता है, तो केवल बाद में शादी से इनकार कर देने के आधार पर दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता।

जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की खंडपीठ ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि समय के साथ सामाजिक परिस्थितियां बदली हैं और आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं अपनी इच्छा और समझ के आधार पर जीवन से जुड़े निर्णय लेने में सक्षम हैं।

IIM रायपुर में हुई थी दोनों की पहचान

मामले के अनुसार, 40 वर्षीय महिला ने वर्ष 2019 में आईआईएम रायपुर के एमबीए कार्यक्रम में प्रवेश लिया था, जहां उसकी पहचान सहपाठी आरोपी से हुई।

शिकायत के मुताबिक, 5 जुलाई 2019 को आरोपी ने पढ़ाई के बहाने महिला को अपने घर बुलाया। महिला का आरोप था कि वहां आरोपी ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद दोनों लंबे समय तक रिश्ते में रहे।

शादी से इनकार के बाद दर्ज कराई शिकायत

महिला का कहना था कि जब भी वह विवाह की बात करती, आरोपी उसे टाल देता था। अगस्त 2021 में आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि महिला के तलाकशुदा होने और ईसाई समुदाय से होने के कारण उसके माता-पिता इस विवाह के लिए तैयार नहीं हैं।

इसके बाद महिला ने राज्य महिला आयोग और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने दोनों के बालिग होने और आपसी सहमति से संबंध स्थापित होने के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया।

ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार

ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में कोई कानूनी त्रुटि, अवैधता या न्यायिक चूक नहीं है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही अपील को खारिज कर दिया।