July 30, 2026

रेप पीड़िता की गर्भपात अनुमति याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म पीड़िता द्वारा गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिसके आधार पर मामले में आगे निर्णय लिया जाएगा।

मामले की सुनवाई जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की वेकेशन बेंच में हुई।

15 सप्ताह की गर्भवती है पीड़िता

याचिकाकर्ता दुष्कर्म की पीड़िता है। याचिका में बताया गया है कि जब वह पुलिस अधिकारियों के संपर्क में आई थी, तब उसकी गर्भावस्था लगभग 12 सप्ताह की थी। वर्तमान में गर्भावस्था करीब 15 सप्ताह की हो चुकी है।

पीड़िता ने स्वयं गर्भावस्था समाप्त करने की सहमति देते हुए शपथपत्र (एफिडेविट) के साथ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में मेडिकल तरीके से गर्भपात की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। पीड़िता ने यह भी बताया है कि वह अब 18 वर्ष की हो चुकी है।

मेडिकल बोर्ड करेगा जांच

वेकेशन बेंच ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 तथा 2021 संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गठित मेडिकल बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनेकोलॉजिस्ट), एक शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन), एक रेडियोलॉजिस्ट, एक सोनोलॉजिस्ट तथा आवश्यकता अनुसार अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।

12 जून को मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने के निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह 12 जून 2026 को दोपहर 2 बजे तक जिला अस्पताल कोरबा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के समक्ष उपस्थित होकर मेडिकल बोर्ड के सामने जांच कराए।

मेडिकल बोर्ड पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद अगली सुनवाई में यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति संबंधी याचिका पर आगे विचार किया जाएगा।

मामले को लेकर हाईकोर्ट ने चिकित्सकीय राय को महत्वपूर्ण मानते हुए रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।