May 15, 2026

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 108 दिन की देरी पर राज्य की आपराधिक अपील खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन द्वारा दायर आपराधिक अपील को केवल 108 दिनों की देरी के आधार पर खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय प्रक्रियाओं का हवाला देकर अपील में हुई देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है।

क्या था पूरा मामला

यह मामला कोरबा जिले के अजाक थाना क्षेत्र से संबंधित है, जिसमें आरोपी संजय कुमार यादव (34 वर्ष) पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 तथा एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट), कोरबा ने 15 अप्रैल को साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया था। इस आदेश को राज्य शासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

108 दिन की देरी बनी मुख्य वजह

राज्य शासन की ओर से दायर अपील में 108 दिनों की देरी हुई थी। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि फाइल प्रक्रिया, विधि एवं विधायी कार्य विभाग से अनुमोदन तथा महाधिवक्ता से राय लेने में समय लगने के कारण यह देरी हुई, जो जानबूझकर नहीं थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि केवल विभागीय प्रक्रियाओं का हवाला देकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार भी लिमिटेशन कानून से बंधी है और सरकारी अधिकारियों की लापरवाही या ढिलाई को उचित कारण नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का उल्लेख किया। विशेष रूप से स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश बनाम रामकुमार चौधरी (2024) मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि अत्यधिक देरी वाली अपीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1788 दिनों की देरी वाली अपील को भी खारिज किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देरी पर सख्त रुख अपनाया जाता है।

अपील और देरी माफी आवेदन दोनों खारिज

इन सभी तथ्यों और कानूनी आधारों को देखते हुए हाईकोर्ट ने देरी माफी आवेदन को खारिज कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार की मुख्य आपराधिक अपील भी स्वतः खारिज हो गई।

कानूनी संदेश

यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि न्यायिक प्रक्रिया में समयबद्धता बेहद महत्वपूर्ण है और सरकारी तंत्र की देरी को अदालतें हल्के में नहीं लेंगी।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त संदेश देता है। 108 दिन की देरी ने राज्य की पूरी अपील को खत्म कर दिया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में समय पालन की अहमियत और अधिक स्पष्ट हो गई है।