May 15, 2026

बस्तर पोटाकेबिन दुष्कर्म मामला: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उम्रकैद को घटाकर 20 साल की सजा में बदला

बिलासपुर। बस्तर के चर्चित एर्राबोर पोटाकेबिन आश्रम में 6 साल 10 महीने की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई “मृत्युपर्यंत उम्रकैद” की सजा में आंशिक संशोधन करते हुए उसे 20 वर्ष की कठोर कैद में बदल दिया है। शेष सजा को कोर्ट ने यथावत रखा है।

यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया।

पूरा मामला:
24 जुलाई 2023 को पीड़िता की मां ने एर्राबोर पोटाकेबिन आश्रम में अपनी 6 साल 10 महीने की बेटी के लापता होने और बाद में उसके साथ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया था कि उसे एक व्यक्ति दूसरे कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जांच के बाद आरोपी माडवी हिडमा उर्फ सोनू उर्फ राजू को गिरफ्तार किया गया था। मेडिकल जांच में आरोपी को यौन संबंध बनाने में सक्षम पाया गया।

चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 450, 363, 366, 324, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया।

ट्रायल कोर्ट का फैसला:
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत “मृत्युपर्यंत उम्रकैद” और अन्य धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई थी, जिन्हें साथ चलाने का आदेश दिया गया था।

हाईकोर्ट का निर्णय:
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले की परिस्थितियों, पीड़िता की उम्र और सबूतों को देखते हुए “मृत्युपर्यंत उम्रकैद” को घटाकर 20 वर्ष की कठोर कैद करना न्यायोचित होगा। हालांकि अन्य धाराओं में दी गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।