रायपुर: छत्तीसगढ़ आज विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक अस्मिता के बीच संतुलन बनाते हुए प्रगति की नई कहानी लिख रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ को लागू किया गया है। यह नीति केवल पर्यटन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय समाज के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बनने जा रही है।
होमस्टे नीति के तहत ग्रामीण परिवार अपने घरों को पर्यटकों के लिए विकसित कर सकेंगे। इससे पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का वास्तविक अनुभव मिलेगा और स्थानीय परिवारों के लिए स्थायी आय का स्रोत भी तैयार होगा। नीति के तहत सरकार द्वारा नए होमस्टे के लिए 1 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता, रिनोवेशन के लिए 50 हजार रुपए और ब्याज पर 100 प्रतिशत सब्सिडी जैसी सुविधाएँ दी जाएंगी। घर अपग्रेड करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता भी उपलब्ध होगी।
यह नीति ‘वोकल फॉर लोकल’ के विचार को साकार करती है। बस्तर और सरगुजा के लोककला, हस्तशिल्प, बांस शिल्प, ढोकरा कला और अन्य पारंपरिक उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े जाएंगे। ग्रामीण महिलाएँ अपने व्यंजन, हस्तकला और आतिथ्य से आत्मनिर्भर बन सकेंगी, जबकि युवाओं को गाइड, ड्राइवर, कुक और कल्चरल प्रेसेंटर के रूप में रोजगार के अवसर मिलेंगे।

सरकार स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देगी, ताकि वे पेशेवर ढंग से होमस्टे संचालन, डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स और सांस्कृतिक प्रस्तुति में सक्षम हों। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विश्वास का माहौल बनाकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
होमस्टे नीति ग्रामीण आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटकों को वास्तविक अनुभव उपलब्ध कराने के बीच संतुलन स्थापित कर रही है। नीति के तहत बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र, जो कभी चुनौतियों के प्रतीक थे, अब विकास और संभावनाओं के केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शिता और संवेदनशील नेतृत्व में यह पहल छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर, समावेशी और सांस्कृतिक गौरव से संपन्न राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।





