May 14, 2026

अवैध खनन पर सख्त हुई सरकार, कलेक्टरों की तय होगी जिम्मेदारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिजों के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जीरो टॉलरेंस नीति लागू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व हानि और अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। साथ ही आम लोगों को उचित दरों पर रेत उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर खनिज विभाग लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने 30 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 11 जिलों के कलेक्टरों की बैठक लेकर रेत खदानों के संचालन की समीक्षा की। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो संबंधित कलेक्टरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

रेत आपूर्ति पर विशेष जोर
बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रदेश में रेत की कमी नहीं होनी चाहिए और स्वीकृत खदानों से उनकी क्षमता के अनुसार उत्पादन सुनिश्चित किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत उपलब्ध कराने के आदेशों का भी सख्ती से पालन करने को कहा गया, ताकि इस सुविधा का दुरुपयोग न हो।

नीलामी में ढिलाई पर नाराजगी
समीक्षा के दौरान पाया गया कि गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा में खदानों की नीलामी 100 प्रतिशत से अधिक हुई है, जबकि धमतरी, बिलासपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर में प्रगति संतोषजनक नहीं है। इस पर सचिव ने नाराजगी जताते हुए संबंधित जिलों को तत्काल नीलामी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।

ड्रोन सर्वे से होगी निगरानी
सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन जिलों में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्रीय उड़नदस्ता दल को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है, वहां प्रशासन की लापरवाही मानी जाएगी। ड्रोन सर्वे या अन्य माध्यमों से अवैध खनन के साक्ष्य मिलने पर संबंधित कलेक्टर और खनन अधिकारियों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अवैध खनन के खिलाफ अब सख्ती और जवाबदेही दोनों साथ-साथ चलेगी।