रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के बाद लखमा को अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। बता दें कि लखमा पिछले एक साल से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन पर 70 करोड़ रुपए के शराब घोटाले का कमीशन पहुंचाने का आरोप था।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाक्ची और जस्टिस पंचोली शामिल थे। ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों मामलों की सुनवाई के बाद लखमा को जमानत दी गई।
पूर्व मंत्री को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें रिमांड और न्यायिक रिमांड पर रखा गया। अब, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लखमा जल्द जेल से बाहर होंगे।
गिरफ्तारी के कारण:
ED का आरोप है कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे। उनके निर्देश पर सिंडिकेट काम करता था और उन्हें मदद मिलती थी। लखमा ने शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और FL-10 लाइसेंस की शुरुआत उनके इशारे पर हुई।
ED के अनुसार, लखमा को आबकारी विभाग में गड़बड़ियों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे रोकने का कोई कदम नहीं उठाया। ED के वकील सौरभ पांडेय ने कहा कि यह घोटाला तीन सालों तक चला, जिसमें लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। कुल मिलाकर 36 महीनों में 72 करोड़ रुपए उनके परिवार और पार्टी भवन के निर्माण में इस्तेमाल हुए।
छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला:
ED की जांच में पाया गया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए यह घोटाला अंजाम दिया गया। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 2,100 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई का जिक्र है।





