July 23, 2026

शराब घोटाला केस: पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत, कोर्ट बोला- सिर्फ आपराधिक इतिहास आधार नहीं

रायपुर। बहुचर्चित कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े उत्तर प्रदेश के मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निरंजन दास को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल किसी आरोपी के आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि वह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, गवाहों को प्रभावित करेगा या फरार होने की आशंका है।

कोर्ट ने कहा- जमानत का उद्देश्य ट्रायल में मौजूदगी सुनिश्चित करना

जस्टिस विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने कहा कि जमानत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी ट्रायल के दौरान अदालत के समक्ष उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि निरंजन दास जांच में बाधा डाल सकते हैं, सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केवल आपराधिक इतिहास के आधार पर जमानत से इनकार करना उचित नहीं माना जा सकता।

2,161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले का मामला

अभियोजन के अनुसार, निरंजन दास पर आरोप है कि आबकारी आयुक्त रहते हुए उन्होंने ऐसी आबकारी नीति और टेंडर प्रक्रिया तैयार की, जिससे नोएडा स्थित एम/एस प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचा। आरोप है कि नकली होलोग्राम के जरिए कथित शराब घोटाले को अंजाम दिया गया। इसी मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में एफआईआर दर्ज हुई थी। उत्तर प्रदेश में मामला इसलिए दर्ज किया गया क्योंकि कथित होलोग्राम की छपाई नोएडा में हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट से पहले ही मिल चुकी थी राहत

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्य शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट मई 2026 में निरंजन दास को पहले ही जमानत दे चुका है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कथित आर्थिक नुकसान छत्तीसगढ़ में हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें 22 गवाहों को शामिल किया गया है।

ट्रायल लंबा चलने की संभावना

अदालत ने कहा कि जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने और ट्रायल लंबा चलने की संभावना को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित है। इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरंजन दास की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत प्रदान की।