May 19, 2026

महिला आयोग सख्त: BSP को लगाई फटकार, पुलिस मामलों की जांच के आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया और ओजस्वी मंडावी ने रायपुर स्थित कार्यालय में विभिन्न प्रकरणों पर सुनवाई की, जिसमें भिलाई स्टील प्लांट (BSP) और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

BSP को आयोग की फटकार
सुनवाई के दौरान एक मामले में यह सामने आया कि भिलाई स्टील प्लांट का एक कर्मचारी दो महिलाओं से संबंध रखते हुए अपनी पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा है। आयोग ने पाया कि BSP प्रबंधन इस तरह के मामलों में ठोस कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती कर रहा है। इस पर आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

अवैध तलाक मान्य नहीं, FIR की सलाह
एक अन्य मामले में महिला ने बताया कि उसे स्टाम्प पेपर पर दबाव बनाकर तलाक दिया गया, जिसे समाज के लोगों ने वैध बताया। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का तलाक कानूनी रूप से मान्य नहीं है। साथ ही महिला को ससुराल पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी गई।

संपत्ति विवाद में बेटियों को मिलेगा हक
एक प्रकरण में विधवा महिला ने अपनी बेटियों के लिए संयुक्त संपत्ति में हिस्सा मांगा, जिसे अनावेदक ने स्वीकार किया। आयोग ने महिला को संपत्ति पर कब्जा लेने और तहसील न्यायालय में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

मुआवजा राशि पर रोक लगाने की अनुशंसा
भारत माला परियोजना से जुड़े एक मामले में करीब 1.64 करोड़ रुपये मुआवजे को लेकर विवाद सामने आया। आयोग ने कलेक्टर दुर्ग और संबंधित बैंक को पत्र भेजकर खाते के लेन-देन पर रोक लगाने की अनुशंसा करने की बात कही, ताकि निष्पक्ष समझौता हो सके।

पुलिस पर गंभीर आरोप, जांच के आदेश
सबसे गंभीर मामले में एक आरक्षक और उसकी पत्नी (महिला आरक्षक) पर फर्जी केस दर्ज कर एक महिला, उसकी बहू और 4 माह के बच्चे को जेल भेजने का आरोप लगा। आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण को जांच के आदेश दिए हैं।

साथ ही डीजीपी छत्तीसगढ़ को पुलिस अधिकारियों द्वारा पद के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की जाएगी।

महिला सुरक्षा पर आयोग सख्त
आयोग ने स्पष्ट किया कि महिला उत्पीड़न के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए जिम्मेदारी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।