रायपुर। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खनिज क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खनिज संपदा से समृद्ध राज्य में खनन न केवल औद्योगिक विकास बल्कि राजस्व और स्थानीय रोजगार का भी प्रमुख स्रोत है। लंबे समय तक यह क्षेत्र पारदर्शिता की कमी, अवैध खनन और राजस्व क्षति जैसी चुनौतियों से जूझता रहा, लेकिन पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने तकनीक आधारित कई सुधार लागू कर खनन व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
राज्य सरकार ने खनन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए “खनिज ऑनलाइन 2.0” पोर्टल शुरू किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए ई-रॉयल्टी पर्ची, ई-अभिवहन पारपत्र और राजस्व संग्रहण जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो गई हैं। इससे खदान संचालकों को 24 घंटे सेवाओं का लाभ मिल रहा है और विभाग को खदानों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा प्राप्त हुई है।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) में भी सुधार किए गए हैं। सरकार ने “डीएमएफ पोर्टल 2.0” लागू कर वित्तीय स्वीकृति, निगरानी और जवाबदेही की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। नई व्यवस्था के तहत सामाजिक सर्वेक्षण और बेसलाइन अध्ययन को अनिवार्य किया गया है, ताकि विकास कार्य स्थानीय जरूरतों के अनुरूप किए जा सकें।
रेत खदानों के संचालन में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2025 से लागू नई नीति के तहत रेत खदानों का आबंटन ई-टेंडरिंग के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में लगभग 200 नई रेत खदानों की नीलामी हो चुकी है। नई व्यवस्था से रेत की उपलब्धता बढ़ी है और कीमतों में पारदर्शिता आई है।
सरकार ने अवैध खनन और राजस्व चोरी पर रोक लगाने के लिए “रेत उपलब्धता अनुबंध” का प्रावधान भी लागू किया है। इसके तहत निर्धारित उत्पादन के अनुरूप रॉयल्टी जमा करना अनिवार्य किया गया है, जिससे अवैध उत्खनन और राजस्व नुकसान पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
बस्तर संभाग के आदिवासी परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए टिन खनिज संग्रहण प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। अब आधार आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचेगा। साथ ही टिन की खरीद दर 640 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 2800 से 2900 रुपये प्रति किलो तक कर दी गई है, जिससे आदिवासी परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
सरकार के इन सुधारों का असर खनिज राजस्व पर भी दिखाई दिया है। पारदर्शिता और डिजिटल नियंत्रण के चलते राज्य को 16,757 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जिसे खनन क्षेत्र में सुधारों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए सरकार ने ड्रोन निगरानी और ई-चेक गेट प्रणाली लागू करने की भी पहल की है। पांच ड्रोन के माध्यम से खदानों की निगरानी और दस प्रमुख परिवहन मार्गों पर ई-चेक गेट स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माना और प्रति टन दो हजार रुपये तक की वसूली का प्रावधान किया गया है।
प्रदेश में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानों की निगरानी अब माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट तकनीक के जरिए की जा रही है। स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन की स्थिति में विभाग को तत्काल सूचना मिलती है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो रही है।
सरकार का दावा है कि तकनीक आधारित निगरानी, डिजिटल प्रक्रियाओं और कठोर नियमों के माध्यम से खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया जा रहा है। इन सुधारों से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।





