July 30, 2026

नैनो उर्वरकों से खेती को नई ताकत: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कृषि क्रांति की नई शुरुआत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसी नई तकनीकों से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 500 मिलीलीटर की एक बोतल नैनो उर्वरक 50 किलोग्राम पारंपरिक उर्वरक के बराबर प्रभावी हो सकती है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा अधिक मात्रा में अवशोषित किए जाते हैं, जिससे उर्वरकों की दक्षता बढ़ती है और फसलों की वृद्धि बेहतर होती है।

राज्य सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है। प्रदेश में वर्तमान में 9.29 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत बताया जा रहा है। सरकार ने संभावित आपूर्ति संकट को देखते हुए वैकल्पिक उर्वरकों और जैविक खेती को भी प्रोत्साहित किया है।

कृषि विभाग किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। विभाग का कहना है कि नैनो डीएपी और पारंपरिक उर्वरकों के संयुक्त उपयोग से किसानों की लागत में कमी आ सकती है और उत्पादन में सुधार संभव है।

उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर निगरानी समितियों और उड़नदस्ता दलों का गठन किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर और निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध हो सके।

धान पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य सरकार दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों को भी बढ़ावा दे रही है। ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार को किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत दलहन और तिलहन फसलों की खरीदी को प्राथमिकता दी जा रही है।

राज्य सरकार का कहना है कि नैनो तकनीक, जैविक खेती और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय से छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है। इसके लिए “कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।