रायपुर: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 के लिए लागू नई संपत्ति गाइडलाइन दरों ने राज्य के रियल एस्टेट बाजार में स्थिरता और पारदर्शिता स्थापित की है। लगभग आठ सालों के बाद किए गए इस बड़े संशोधन से भूमि और मकानों की कीमतें वास्तविक बाजार स्तर के करीब आई हैं, जिससे आम नागरिक, किसान, निवेशक और डेवलपर्स सभी को विश्वास और राहत मिली है।

वर्षों पुरानी विसंगतियों का अंत: 2018-19 के बाद गाइडलाइन दरों का राज्यव्यापी पुनरीक्षण नहीं हुआ था, जिससे रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बाजार मूल्य में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरों ने “समान परिस्थिति-समान दर” का सिद्धांत अपनाकर यह अंतर समाप्त किया।

वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर आधारित निर्णय: नई दरें जिलेवार बिक्री आंकड़ों, राजस्व रिकॉर्ड, बाजार विश्लेषण और जमीनी सर्वेक्षण के आधार पर तय की गई हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां पुरानी दरें कम थीं, वहां 100–300 प्रतिशत तक वृद्धि की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक बढ़ोतरी पर संतुलन स्थापित किया गया।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक लाभ: महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकरण पर 50% छूट का प्रावधान सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण का संकेत देता है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लाभ: नई नीति से किसानों को भूमि अधिग्रहण पर 25–40 प्रतिशत अधिक मुआवजा मिलने का अनुमान है। बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और होम लोन स्वीकृति में 14% तक वृद्धि दर्ज की गई है। डेवलपर्स को प्रोजेक्ट योजना, फंडिंग और बैंक गारंटी में सहायता मिली है, जिससे नई कॉलोनियों और टाउनशिप परियोजनाओं को गति मिली।
सामाजिक और प्रशासनिक सुधार: स्व-नामांतरण व्यवस्था से संपत्ति खरीदारों को नामांतरण प्रक्रिया में समय की बचत मिली है। संतुलित गाइडलाइन दरों ने राज्य में स्थिर राजस्व, पारदर्शी लेनदेन और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम केवल संपत्ति दरों का पुनर्निर्धारण नहीं, बल्कि सुशासन और विकास का मॉडल प्रस्तुत करता है। नए नियमों से राज्य में निवेश-अनुकूल माहौल तैयार हुआ है, ग्रामीण और शहरी विकास को नई दिशा मिली है और भूमि बाजार में विश्वास मजबूत हुआ है।





