March 4, 2026

रायपुर : खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़, 10,796 हेक्टेयर में हो रही ऑयल पाम की खेती

रायपुर, 12 फरवरी 2026।
खाद्य तेल में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में अब तक 10,796 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का रोपण किया जा चुका है, जिससे 7,315 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा भी ऑयल पाम के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हांकित कर रकबा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग एवं बेमेतरा जिलों का दौरा कर किसानों के खेतों में योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिक क्षेत्र में ऑयल पाम लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन, समेकित उद्यानिकी विकास कार्यक्रम तथा नेशनल मिशन ऑन ऑयल पाम के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया।

ऑयल पाम से बढ़ रही किसानों की आमदनी

राज्य में ऑयल पाम की खेती वर्ष 2012-13 से की जा रही है। वर्तमान में सभी जिलों में लगभग 10,796 हेक्टेयर में रोपण हो चुका है और अब तक करीब 1,394.88 टन फ्रेश फ्रूट बंच का उत्पादन हुआ है।

भारत सरकार द्वारा फ्रेश फ्रूट बंच का न्यूनतम मूल्य 16,460.46 रुपये प्रति टन तय किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में किसानों से 22,000 रुपये प्रति टन की दर से सीधी खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है।

अंतरवर्ती फसलों से भी हो रहा लाभ

संचालक श्री लोकेश कुमार ने दुर्ग जिले के ग्राम ढाबा में श्रीमती सुनिती देवी मढरिया के एक हेक्टेयर में ऑयल पाम के साथ टमाटर तथा श्री प्रवीण मढरिया के खेत में केले की अंतरवर्ती खेती का अवलोकन किया। उन्होंने परसदापार, चिखला, राजपुर एवं बेमेतरा जिले के डोंगीतराई गांव में भी रोपित ऑयल पाम, केला, आम, फेंसिंग और ड्रिप सिंचाई व्यवस्था का निरीक्षण किया।

किसानों को पौध, फेंसिंग, ट्यूबवेल, ड्रिप सिंचाई और अंतरवर्ती फसलों पर मिलने वाली आर्थिक सहायता तथा बाजार व्यवस्था की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि ऑयल पाम किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन रहा है।

राजपुर स्थित शासकीय बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र में प्लग टाइप सीडलिंग यूनिट का भी निरीक्षण कर इसे शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को गुणवत्तायुक्त पौध समय पर उपलब्ध हो सके।