June 9, 2026

NGT प्रतिबंध से पहले आरंग में रेत माफियाओं की सक्रियता बढ़ी, तालाब पाटकर बनाया अवैध डंपिंग यार्ड

आरंग। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा मानसून के दौरान रेत उत्खनन पर प्रस्तावित प्रतिबंध से पहले आरंग क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार तेज हो गया है। कुरूद, कुटेला, मोहमेला, हरदीडीह और कागदेही सहित कई गांवों में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध भंडारण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुटेला गांव में एक सार्वजनिक तालाब को पाटकर उसे अवैध रेत डंपिंग यार्ड में बदल दिया गया है।

तालाब पर अवैध कब्जे का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार रेत माफियाओं ने तालाब के हिस्से को मिट्टी और मलबे से भर दिया है। इसके बाद वहां लगातार हाईवा और पोकलेन मशीनों के जरिए रेत का भंडारण किया जा रहा है। इससे जल स्रोत के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

कई गांव बने अवैध स्टोरेज हब

ग्रामीणों का दावा है कि एनजीटी प्रतिबंध के दौरान रेत की बढ़ती मांग और कीमतों का लाभ उठाने के लिए माफियाओं ने क्षेत्र के कई गांवों में बड़े पैमाने पर अवैध स्टॉक जमा कर लिया है। कुरूद, कुटेला, मोहमेला, हरदीडीह और कागदेही में रेत के बड़े-बड़े ढेर देखे जा सकते हैं।

सुशासन तिहार में शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं

कुटेला की सरपंच कमलेश्वरी संतोष जलक्षत्री ने आरोप लगाया है कि अवैध रेत डंपिंग को लेकर सुशासन तिहार शिविर में लिखित शिकायत और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे। इसके बावजूद खनिज विभाग और स्थानीय राजस्व अमले द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

संरक्षण के आरोप, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि प्रशासन और खनिज विभाग की जानकारी के बावजूद अवैध कारोबार कैसे जारी है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई कर अवैध डंपिंग यार्ड सीज नहीं किए गए और तालाब को मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया गया, तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान

स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध रेत भंडारण और उत्खनन से न केवल पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है, बल्कि शासन को राजस्व का भी नुकसान पहुंच रहा है। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।