September 4, 2026

Chhattisgarh Politics: झीरम घाटी मामले पर कांग्रेस के बयान पर अजय चंद्राकर का पलटवार, बोले- कांग्रेस भवन से ही फैसला सुना दें; ‘पार्षद पति’ व्यवस्था पर भी साधा निशाना

रायपुर। झीरम घाटी मामले की एनआईए स्पेशल कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर कांग्रेस के बयानों पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर झीरम मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता खुद ही जज बन जाएं और कांग्रेस भवन से ही फैसला सुना दें। चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस को सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है और वह केवल झीरम मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है।

भाजपा को कांग्रेस से मार्गदर्शन की जरूरत नहीं: चंद्राकर

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर भाजपा सरकार और संगठन की ओर से कार्यक्रम नहीं करने और बधाई नहीं देने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस आज प्रदेश के 15 जिलों में इस मुद्दे को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रही है।

इस पर अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विश्व के मूल निवासियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस 9 अगस्त को मनाया जाता है और कांग्रेस को इससे जुड़े प्रस्ताव को पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस से किसी तरह के मार्गदर्शन की जरूरत नहीं है।

चंद्राकर ने कांग्रेस से सवाल किया कि उसने आदिवासियों के लिए क्या किया है और आदिवासी समाज के हित में उसके कार्यों का हिसाब भी सामने रखना चाहिए।

‘हाइब्रिड नस्ल के हैं…’ कांग्रेस पर चंद्राकर का विवादित तंज

कांग्रेस की ओर से भाजपा पर महिलाओं की राजनीति में सबसे ज्यादा दखल देने का आरोप लगाए जाने के बाद अजय चंद्राकर ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस खुद महिला और महिला पुत्र के इर्द-गिर्द चल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कांग्रेस पार्टी में महिला और उनके पुत्र का ही दखल है। इसी दौरान कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने उन्हें ‘हाइब्रिड नस्ल’ का बताया और कहा कि वे देसी नस्ल के भी नहीं हैं।

‘पार्षद पति’ व्यवस्था खत्म करने को महिला सशक्तिकरण का कदम बताया

छत्तीसगढ़ में ‘पार्षद पति’ व्यवस्था खत्म करने को लेकर सरकार की ओर से राजपत्र जारी किए जाने पर भी अजय चंद्राकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

चंद्राकर ने कहा कि राजनीतिक और गैर-राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर इस व्यवस्था पर काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वयं अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।

झीरम घाटी मामले से लेकर आदिवासी दिवस और महिला सशक्तिकरण के मुद्दे तक अजय चंद्राकर के बयानों ने छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।