July 31, 2026

संविदा बिजली कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से प्रभावित हुई विद्युत व्यवस्था, नियमितीकरण की मांग पर अड़े कर्मचारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत संविदा कर्मचारी संघ (722) द्वारा नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन और संविलियन की मांग को लेकर शुरू किया गया चरणबद्ध आंदोलन अब अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल में बदल गया है। हड़ताल का असर प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संघ के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में पॉवर कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन तथा संविलियन शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इन मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

संघ ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में 25 मई 2026 को रायपुर स्थित विद्युत सेवा भवन, डंगनिया के सामने विशाल आमसभा आयोजित की गई थी। इसके बाद मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर दूसरे चरण के तहत 22 जून 2026 से अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया गया।

हड़ताल शुरू होने से पहले पॉवर कंपनी प्रबंधन ने संघ को द्विपक्षीय वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि संघ का आरोप है कि बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय लेने के लिए सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं थे, जिसके कारण नियमितीकरण और समायोजन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।

हड़ताल का असर अब बिजली आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों से घंटों तक बिजली बाधित रहने और शिकायतों के समाधान में देरी की जानकारी सामने आ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि फील्ड स्तर पर रखरखाव और तकनीकी कार्यों में संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उनके कामबंद करने से व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

संघ का दावा है कि पॉवर कंपनी में वर्ष 2007, 2009 और 2011 में नियुक्त संविदा कर्मचारियों को कुछ वर्षों बाद नियमित कर दिया गया था, जबकि वर्ष 2016 और 2018 में भर्ती हुए कर्मचारी 8 से 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद आज भी संविदा व्यवस्था में कार्यरत हैं।

कर्मचारियों ने सुरक्षा संबंधी मुद्दे भी उठाए हैं। संघ के अनुसार विद्युत कार्यों के दौरान हुई विभिन्न दुर्घटनाओं में अब तक 41 संविदा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई कर्मचारी स्थायी और अस्थायी रूप से दिव्यांग हुए हैं। उनका कहना है कि जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं।

संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक नियमितीकरण, रिक्त पदों पर समायोजन और संविलियन संबंधी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन जारी रहेगा। वहीं बिजली व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए अब सरकार और पॉवर कंपनी प्रबंधन की अगली पहल पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।