बिलासपुर। छत्तीसगढ़ से निकलने वाली 19 प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ने बताया कि नदियों के सूखते स्रोतों की पहचान करने और उनके संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत कार्य करेगी और नदियों के उद्गम स्थलों को चिन्हित कर सुरक्षित करने की दिशा में काम करेगी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी प्रमुख नदियों और उनके उद्गम स्थलों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश दिए। फिलहाल कई नदियों के उद्गम स्थल राजस्व रिकॉर्ड में नाले के रूप में दर्ज हैं, जिससे उनके संरक्षण में कठिनाई आ रही है।
6 नदियों के लिए पहले ही बन चुकी है समिति
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि महानदी, हसदेव, तांदूला, पैरी, केलो और मांड नदियों के संरक्षण के लिए पहले ही समिति गठित की जा चुकी है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इन समितियों में इतिहासकारों, लेखकों और पर्यावरणविदों को भी शामिल किया गया है, ताकि संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
11 प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन की योजना
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि अरपा नदी में सालभर जल प्रवाह बनाए रखने की योजना के साथ प्रदेश की 11 प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन (रिवाइवल) पर भी कार्य किया जा रहा है। नई समिति नदियों के स्रोतों की पहचान, संरक्षण और प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देगी।
उद्गम स्थल से आगे के क्षेत्र के संरक्षण पर भी जोर
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि केवल उद्गम स्थल सुरक्षित करना पर्याप्त नहीं होगा। उद्गम स्थल से आगे लगभग दो किलोमीटर तक के प्राकृतिक जल प्रवाह क्षेत्र को भी अतिक्रमण और खेती से मुक्त कर संरक्षित करना आवश्यक है। जरूरत पड़ने पर निजी भूमि का अधिग्रहण कर प्राकृतिक प्रवाह बहाल किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस सुझाव से सहमति जताते हुए राज्य सरकार को इस दिशा में भी प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 19 छोटी-बड़ी नदियों के उद्गम स्थलों पर बढ़ते अतिक्रमण और उनके सूखने के कारणों की वैज्ञानिक जांच तथा संरक्षण बेहद जरूरी है।





