May 19, 2026

RTE पर सख्त सरकार: बच्चों को प्रवेश नहीं देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि RTE के तहत बच्चों को प्रवेश देने से इंकार करने वाले स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

दरअसल, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर RTE के तहत प्रवेश नहीं देने के ऐलान के बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। सरकार ने दो टूक कहा है कि RTE के प्रावधानों का पालन करना सभी निजी स्कूलों की वैधानिक जिम्मेदारी है।

25% सीटें आरक्षित, देना होगा प्रवेश
प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश देना अनिवार्य है।

अन्य राज्यों से बेहतर बताई प्रतिपूर्ति राशि
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में दी जा रही शुल्क प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या उनके बराबर है। वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक ₹7,000 और कक्षा 6 से 8 तक ₹11,400 प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा रहा है।

तुलनात्मक रूप से मध्य प्रदेश में ₹4,419, बिहार में ₹6,569, झारखंड में ₹5,100 और उत्तर प्रदेश में ₹5,400 की प्रतिपूर्ति दी जाती है। हालांकि ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में यह राशि अधिक है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की व्यवस्था को संतुलित बताया गया है।

साढ़े तीन लाख से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ
प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में वर्तमान में लगभग 3,63,515 बच्चे RTE के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इस वर्ष कक्षा पहली में करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।

सरकार की प्राथमिकता—सभी को शिक्षा
RTE अधिनियम 2009 के तहत अप्रैल 2010 से राज्य में यह व्यवस्था लागू है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई निजी स्कूल RTE के तहत प्रवेश देने से मना करता है या प्रक्रिया में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता समाप्त करना भी शामिल है।

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करें।