रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सख्ती के चलते एक जरूरतमंद बच्चे को 10 माह बाद न्याय मिला। आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग का पोर्टल खुलवाया, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत बच्चे को निःशुल्क प्रवेश दिलाया और स्कूल से ली गई पूरी फीस वापस करवाई।
लॉटरी में चयन के बाद भी नहीं मिला लाभ
प्रकरण में अभिभावक ने अपने बच्चे के लिए आरटीई के तहत आरक्षित सीट पर आवेदन किया था। अप्रैल में प्रथम चरण की लॉटरी में बच्चे का चयन हो गया, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने संपर्क नहीं होने का दावा किया। वहीं नोडल अधिकारी ने भी पालक का फोन न उठाने की बात कही।
जानकारी के अभाव में अभिभावक को उसी स्कूल में 16 हजार रुपये जमा कर प्रवेश लेना पड़ा। बाद में जानकारी मिलने पर उन्होंने लगभग 10 माह बाद आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग के हस्तक्षेप से खुला पोर्टल
आयोग ने सुनवाई के बाद शिक्षा विभाग को पोर्टल पुनः खोलने और बच्चे का नाम निःशुल्क सीट में दर्ज करने के निर्देश दिए। 23 फरवरी 2026 को आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की मौजूदगी में स्कूल प्रबंधन ने अभिभावक को 16 हजार रुपये का चेक लौटाया।
बच्चों के अधिकारों से समझौता नहीं
डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने आदेश में कहा कि पात्र बच्चों को आरटीई के तहत निःशुल्क शिक्षा देना स्कूलों की जिम्मेदारी है और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
आयोग की इस कार्रवाई से जरूरतमंद अभिभावकों को राहत मिली है और शिक्षा के अधिकार से जुड़े मामलों में जवाबदेही का संदेश गया है।





