March 3, 2026

Chhattisgarh Sex CD Case : 2017 से 2026 तक का पूरा घटनाक्रम, फिर चर्चा में भूपेश बघेल से जुड़ा मामला

Raipur News : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर चर्चित सेक्स सीडी केस सुर्खियों में है। इस पूरे मामले की शुरुआत 27 अक्टूबर 2017 को हुई थी, जब तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने रायपुर स्थित बंगले में कथित सेक्स सीडी को सार्वजनिक किया था। करीब साढ़े आठ साल के सफर में इस केस ने कई बड़े राजनीतिक और कानूनी मोड़ देखे हैं।


📌 कैसे शुरू हुआ सेक्स सीडी विवाद?

27 अक्टूबर 2017 की सुबह करीब 6 बजे भूपेश बघेल ने पत्रकार विनोद वर्मा और कारोबारी कैलाश मुरारका के साथ अपने बंगले में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मीडिया को एक सीडी बांटी गई।

भूपेश बघेल का दावा था कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति तत्कालीन भाजपा मंत्री राजेश मूणत है, जो एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहा है। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

हालांकि मंत्री राजेश मूणत ने तुरंत इसे फर्जी बताते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।


📌 भाजपा नेता ने दर्ज कराई पहली शिकायत

भाजपा नेता प्रकाश बजाज की शिकायत पर 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में पहला केस दर्ज किया गया। एफआईआर में ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया गया था।

शिकायत में कहा गया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने लैंडलाइन से फोन कर कहा था कि तुम्हारे आकाओं के अश्लील वीडियो हैं, पैसे दो नहीं तो सीडी बनाकर बांट दी जाएगी।


📌 दिल्ली में बनाई गई थी मॉर्फ सीडी

पुलिस जांच में नंबर ट्रेस होने के बाद दिल्ली की एक दुकान तक पहुंच बनाई गई, जहां सीडी रिकॉर्डिंग होती थी।

सीबीआई और पुलिस का दावा है कि यहीं पर कथित तौर पर मॉर्फ वीडियो तैयार किया गया और यहीं से आरोपी विनोद वर्मा तक पहुंचा गया। इसके बाद अन्य आरोपियों पर केस दर्ज किया गया।


📌 भूपेश बघेल और विनोद वर्मा की गिरफ्तारी

सितंबर 2018 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने गाजियाबाद से वरिष्ठ पत्रकार और भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया।

पुलिस का दावा था कि वर्मा के घर से अश्लील वीडियो की करीब 500 सीडी और 2 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। इस दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल को भी गिरफ्तार किया गया था।


📌 भूपेश के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट

गिरफ्तारी के बाद भूपेश बघेल ने जमानत लेने से इनकार किया था। पूरे राज्य में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए।

कुछ दिनों बाद रिहा होने के बाद कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 90 में से 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई। इसे भूपेश बघेल के राजनीतिक करियर का टर्निंग पॉइंट माना गया।


📌 सीबीआई ने केस ट्रांसफर की मांग की

सीबीआई ने दावा किया कि करीब 95 हजार रुपये में मॉर्फ सीडी तैयार की गई और दिल्ली में इसकी कॉपियां बनवाई गईं।

2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सीबीआई ने केस दिल्ली ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई थी, क्योंकि इसमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए थे। मामला लंबे समय तक अदालत में लंबित रहा।


📌 स्पेशल कोर्ट से मिली थी राहत

जनवरी 2025 में दिल्ली कोर्ट ने केस ट्रांसफर से इनकार किया, जिसके बाद रायपुर की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई।

4 मार्च 2025 को स्पेशल कोर्ट ने भूपेश बघेल को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था और कहा था कि मुकदमा चलाने का कोई आधार नहीं है।

इसके बाद सीबीआई ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की।


📌 23 फरवरी को होगी पहली सुनवाई

रायपुर सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी को लोअर कोर्ट के फैसले को निरस्त कर रिव्यू पिटीशन मंजूर कर ली।

इसके बाद केस की पहली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है। सेशन कोर्ट ने भूपेश बघेल को नियमित रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।


📌 हाईकोर्ट जाने की तैयारी में भूपेश बघेल

सेशन कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट का रुख करने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि उन्हें पहले ही डिस्चार्ज किया जा चुका है, लेकिन अब राजनीतिक प्रतिशोध के तहत केस को दोबारा खड़ा किया जा रहा है। भूपेश बघेल ने कहा, “सच्चाई अदालत में सामने आएगी, हम लड़ेंगे और जीतेंगे।”


📌 मुरारका और वर्मा को नहीं मिली राहत

कारोबारी कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा की डिस्चार्ज याचिका को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

कोर्ट का कहना है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इस केस में अब भूपेश बघेल, कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं।

वहीं एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने पहले ही आत्महत्या कर ली थी।