September 4, 2026

छत्तीसगढ़ में खेल क्रांति को नई रफ्तार: ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ से खिलाड़ियों को मिल रहे अवसर, अधोसंरचना पर 100 करोड़ का फोकस

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से खेलों को केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए युवा सशक्तिकरण, अनुशासन और सामाजिक विकास का माध्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में शुरू किया गया ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

खेल अधोसंरचना के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिकता देते हुए वर्तमान बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से आवश्यक खेल भवनों के निर्माण के साथ खिलाड़ियों को आधुनिक उपकरण, बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से प्रदेश में खेलों के लिए एक मजबूत और व्यापक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

156 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी

खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी सरकार ने कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री द्वारा 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है।

राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव को 30 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के साथ ‘आउट ऑफ टर्न’ DSP पद पर नियुक्ति भी दी गई है। सरकार इसे खिलाड़ियों के सम्मान और प्रोत्साहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

बस्तर और सरगुजा ओलंपिक से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच

खेलों को प्रदेश के दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाने के लिए बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों की शुरुआत की गई है। इन प्रतियोगिताओं के जरिए आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं, प्रदेश में पहली बार आयोजित ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ ने भी आदिवासी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई है।

महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मान

महिला सशक्तिकरण और खेलों में बेटियों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में भी सरकार की ओर से सम्मान कार्यक्रम किए गए हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की फिजियोथेरेपिस्ट और छत्तीसगढ़ की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी को सम्मानित करते हुए उन्हें टाटा सिएरा कार उपहार में दी गई।

सरकार का कहना है कि राज्य की बेटियों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को सम्मान देने से अन्य युवा खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

150 करोड़ से ज्यादा की खेल परियोजनाएं

प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

इनमें जशपुर में अत्याधुनिक तीरंदाजी अकादमी, कुनकुरी में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बगीचा में इंडोर बैडमिंटन स्टेडियम, मयाली में एडवेंचर स्पोर्ट्स और घोलेंग में फुटबॉल स्टेडियम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के जरिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

पहाड़ी कोरवा की तीरंदाजी प्रतिभा को बढ़ावा

जशपुर क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा जनजाति की पारंपरिक तीरंदाजी प्रतिभा को पहचानकर उसे आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह पहल स्थानीय परंपरा और आधुनिक खेल प्रशिक्षण के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है।

स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव से बनेगी दीर्घकालिक रणनीति

खेलों के विकास के लिए स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसी पहल भी की जा रही है। इसमें खिलाड़ी, कोच, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता एक मंच पर आकर प्रदेश की खेल नीति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा कर सकेंगे।

इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति तैयार करना है, ताकि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण से लेकर प्रतियोगिताओं और रोजगार तक बेहतर अवसर मिल सकें।

युवाओं को नई दिशा देने पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, अनुशासन और आत्मविश्वास को मजबूत करने का जरिया भी है। इसी सोच के तहत प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खेल मैदानों के निर्माण और पुराने मैदानों के जीर्णोद्धार पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार के मुताबिक, खेल सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी को इसी प्रयास का परिणाम बताया जा रहा है।

सरकार की खेल नीतियों, अधोसंरचना के विस्तार और प्रतिभाओं को मिल रहे प्रोत्साहन के बीच छत्तीसगढ़ में खेलों को लेकर नई संभावनाएं बन रही हैं। आने वाले समय में इन योजनाओं का असर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं और प्रतियोगी प्रदर्शन पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।