रायपुर।
Raipur में छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश में कार्यरत गिग वर्करों की स्थिति, अधिकारों और राज्य स्तर पर नियमन को लेकर जोरदार चर्चा हुई।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि Swiggy, Zomato, Blinkit और Rapido जैसी कंपनियों में कार्यरत गिग वर्करों को संगठित मजदूरों की श्रेणी में रखा जाएगा या असंगठित में।
“गिग वर्कर मर रहे हैं, कंपनियां ऐश कर रही हैं”
अजय चंद्राकर ने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने आउटसोर्सिंग कंपनियों को लेकर सवाल उठाया था, लेकिन तब भी सरकार ने स्पष्ट कानून न होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि तेज डिलीवरी मॉडल—जैसे “10 मिनट डिलीवरी”—के दबाव में कई गिग वर्करों की जान जा रही है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है।
चंद्राकर ने उल्लेख किया कि वर्ष 2020 में लागू Code on Social Security 2020 के बावजूद अब तक स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छत्तीसगढ़ समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग कर अलग अधिनियम या नियम बनाने पर विचार करेगा?
“फिलहाल न संगठित, न असंगठित” — मंत्री
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Lakhanlal Dewangan ने सदन में जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में गिग वर्करों को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में।
उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के अंतर्गत गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया गया है और जैसे ही भारत सरकार इस संबंध में नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसका पालन करेगी।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने इस विषय पर एक समिति गठित की थी, लेकिन केंद्र द्वारा चार श्रम संहिताएं लागू किए जाने के बाद राज्य की प्रक्रिया केंद्र के अधिनियम के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने दोहराया कि राज्य में नियम भारत सरकार के अधीन बनाए जाएंगे।





