रायपुर | छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और नशाखोरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अफीम की अवैध खेती और ड्रग्स कारोबार में शामिल लोगों पर किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
सोमवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (NCORD) की दूसरी तिमाही बैठक में उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की और कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
तस्करी पर सख्त निगरानी के निर्देश
मुख्य सचिव ने पुलिस, डाक विभाग और निजी कूरियर सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने को कहा। उन्होंने परिवहन और कूरियर सेवाओं पर कड़ी निगरानी रखने तथा तस्करी में प्रयुक्त वाहनों को जब्त कर उनकी नीलामी की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही अवैध केमिकल ड्रग प्रयोगशालाओं की पहचान कर तत्काल छापेमारी और कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
नशामुक्ति और पुनर्वास पर फोकस
नशे की समस्या से निपटने के लिए मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि प्रत्येक जिला अस्पताल में कम से कम 10 बिस्तरों वाला नशा मुक्ति केंद्र अनिवार्य रूप से स्थापित किया जाए। जरूरत के अनुसार नए केंद्र भी खोले जाएं।
उन्होंने नशामुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन 1333 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास सख्ती
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ड्रग फ्री जोन घोषित कर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। जब्त मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण (डिस्ट्रक्शन) की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए।
उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में डीजीपी अरुण देव गौतम, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, गृह सचिव नेहा चंपावत सहित समाज कल्याण, आबकारी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और एनसीबी के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागायुक्त, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।





