रायपुर। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने जनगणना 2026-27 के स्व जनगणना पोर्टल में मातृभाषा के कॉलम में “छत्तीसगढ़ी भाषा” का विकल्प शामिल करने की मांग की है। इस संबंध में पार्टी ने जिलाधीश रायपुर को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी ने कहा कि छत्तीसगढ़िया जनमानस की भावनाओं के अनुरूप जनगणना फॉर्म में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल किया जाना आवश्यक है, ताकि वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें।
छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा
ज्ञापन में बताया गया कि 28 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ शासन राजभाषा आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि छत्तीसगढ़ी व्याकरण की रचना वर्ष 1885 में महान साहित्यकार हीरालाल चन्नाहू द्वारा की जा चुकी है।
पार्टी के अनुसार छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में लगभग 3.5 करोड़ लोग दैनिक जीवन में छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करते हैं।
जनगणना सर्वे का हवाला
ज्ञापन में भारत सरकार के वर्ष 2020 के भाषाई सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा गया कि छत्तीसगढ़ में 65% से अधिक लोग छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करते हैं, जबकि हिंदी बोलने वालों का प्रतिशत मात्र 2% बताया गया है। इसके बावजूद जनगणना प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ी भाषा को उचित स्थान नहीं दिया जा रहा है।
पार्टी की मांगें
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने मांग की है कि—
- जनगणना पोर्टल और फॉर्म में छत्तीसगढ़ी भाषा को अनिवार्य विकल्प के रूप में शामिल किया जाए
- छत्तीसगढ़ी भाषा को प्राथमिक शिक्षा में शामिल किया जाए
- सभी शासकीय कार्य छत्तीसगढ़ी भाषा में किए जाएं
- छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में प्रयास किए जाएं
पार्टी ने कहा कि यदि जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा शामिल नहीं होती है तो वास्तविक भाषाई आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे।





