July 31, 2026

रामगढ़ महोत्सव-2026 में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं का किया अवलोकन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंगलवार को सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन कर इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेखों, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी भ्रमण किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

“रामगढ़ हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संसाधनों से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहर भी विश्व स्तर पर विशेष पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी विरासतों का संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलें।

इतिहास और साहित्य से जुड़ा है रामगढ़

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख और चित्रकला की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने अपनी कालजयी कृति “मेघदूतम्” की रचना इन्हीं पहाड़ियों में की थी। इसी ऐतिहासिक और साहित्यिक परंपरा को संरक्षित रखने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

करीब 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्र तथा यहां प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाते हैं।

हाथीपोल भी पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण

रामगढ़ की एक और प्रमुख पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची यह सुरंग अपनी अनूठी प्राकृतिक संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ।

सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं पूरे क्षेत्र को ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।