रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जा रही कथित अमानक और निम्न स्तरीय दवाओं के मुद्दे को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा है कि पिछले कई महीनों से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को वितरित की जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स और विभिन्न शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जानी चाहिए।
दवाओं की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) समय-समय पर अपनी ही सप्लाई की गई दवाओं को ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के आधार पर अमानक या निम्न स्तरीय बताते हुए वापस मंगाने के आदेश जारी करता रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसी दवाओं पर रोक लगाए जाने से पहले बड़ी संख्या में मरीज उनका उपयोग कर चुके होते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
अस्पतालों से भी मिलती रही शिकायतें
कांग्रेस के अनुसार मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और फार्मेसी स्टाफ द्वारा भी कई बार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर आशंका व्यक्त की गई है। पार्टी का आरोप है कि ऐसी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर दवाओं का भंडारण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जाता, जिससे उनकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
दो वर्षों की खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग
कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के माध्यम से की गई दवा खरीदी और आपूर्ति प्रक्रिया की व्यापक जांच कराई जाए। पार्टी का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
जांच दल गठित करने की मांग
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सप्लाई की जा रही दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच दल गठित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाएं।
कांग्रेस का कहना है कि जांच के माध्यम से पूरे मामले के तथ्यों को सामने लाया जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।





