Raigarh। जिले में एक अनोखी आदिवासी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक सात फेरों के साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा दशकों पुरानी बताई जा रही है, जिसे आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है।

अंगारों पर चलकर निभाई गई शादी की रस्म
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह परंपरा आज भी जीवित है। शादी के बाद दुल्हन के गृह प्रवेश के समय घर के देवी-देवताओं की पूजा के बाद मंडप में जलते अंगारे बिछाए जाते हैं। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन समेत परिवार के सदस्य नंगे पांव अंगारों पर चलकर रस्म पूरी करते हैं।
देवता सवार होने की मान्यता
परंपरा के अनुसार, मंडप में बकरे की बलि देने के बाद घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता है। इसके बाद वे पूरे अनुष्ठान का नेतृत्व करते हैं और अंगारों पर चलने की प्रक्रिया संपन्न कराते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान किसी के पैरों में जलन या चोट नहीं होती।
उपवास और विशेष अनुष्ठान
परिवार के सदस्य इस दौरान उपवास रखते हैं और कई लोग पानी तक ग्रहण नहीं करते। दुल्हन के घर आने पर बकरे की बलि देकर तिलक लगाया जाता है, फिर मंडप में दूसरी बलि के बाद अंगारों पर चलने की रस्म पूरी होती है।
परंपरा से जुड़ी आस्था
ग्रामीणों का मानना है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और हर शादी में इसे निभाना अनिवार्य है। उनका विश्वास है कि यदि यह रस्म नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर विपत्ति आ सकती है।
देखने उमड़ती है भीड़
इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जलते अंगारों पर चलते दूल्हा-दुल्हन का दृश्य लोगों के लिए आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।





