नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित संविधान सदन के ऐतिहासिक परिसर में कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) के 28वें संस्करण का भव्य उद्घाटन किया। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक आयोजित होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं।
इस सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और विधायी संस्थाओं के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना है।
🏛️ संसदीय संस्कृति में धैर्य और संवाद पर ज़ोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि
“संसद में जिम्मेदारी केवल बोलने की नहीं, बल्कि सुनने की भी होती है। हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। सभी अच्छे स्पीकर्स का सबसे बड़ा गुण धैर्य होता है।”
उन्होंने कहा कि शोरगुल और उत्साह से भरे सदस्यों को भी मुस्कान और संयम से संभालना ही सशक्त संसदीय परंपरा की पहचान है।
📜 संविधान सदन का ऐतिहासिक महत्व
पीएम मोदी ने कहा कि जिस स्थान पर सम्मेलन हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा है।
- आज़ादी से पहले यहीं संविधान सभा की बैठकें हुईं
- यहीं भारत के संविधान की रचना की गई
उन्होंने सभी प्रतिनिधियों का इस ऐतिहासिक स्थल पर स्वागत किया।
भारत ने विविधता को लोकतंत्र की ताकत बनाया
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के समय यह आशंका जताई गई थी कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतंत्र नहीं संभाल पाएगा, लेकिन भारत ने इसे अपनी सबसे बड़ी शक्ति बना दिया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं भारत को स्थिरता, गति और कौशल प्रदान कर रही हैं।
🌍 दुनिया में भारत की मजबूत स्थिति
पीएम मोदी ने भारत की वैश्विक उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा—
- सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था
- दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम
- सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश
- स्टील उत्पादन में दूसरा स्थान
- तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
- तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट
- रेलवे नेटवर्क में चौथा स्थान
- मेट्रो रेल नेटवर्क में तीसरा स्थान
- दूध उत्पादन में पहला और चावल उत्पादन में दूसरा स्थान
🤝 लोक कल्याण ही लोकतंत्र की आत्मा
प्रधानमंत्री ने कहा—
“भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं, बल्कि लास्ट माइल डिलीवरी है।”
उन्होंने बताया कि बिना किसी भेदभाव के योजनाएं हर नागरिक तक पहुंचाने के प्रयासों के कारण पिछले कुछ वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
🌐 CSPOC सम्मेलन का महत्व
संविधान सदन में आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के—
- संसदाध्यक्ष
- पीठासीन अधिकारी
- वरिष्ठ संसदीय प्रतिनिधि
शामिल हुए हैं। सम्मेलन में संसदीय पारदर्शिता, विधायी प्रक्रियाओं को मजबूत करने और वैश्विक लोकतंत्र को सशक्त बनाने जैसे विषयों पर गहन मंथन होगा।





