March 5, 2026

डाक बचत खातों में 1.91 करोड़ की अनियमितता: उपभोक्ता आयोग ने डाक विभाग को ठहराया दोषी

रायपुर। डाक बचत खातों में हुई बड़ी वित्तीय अनियमितता के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय डाक विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए खाताधारकों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने एजेंट एवं विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत को सेवा में गंभीर कमी मानते हुए डाक विभाग को 1.91 करोड़ रुपये से अधिक की परिपक्वता राशि ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है।

परिवादी अनिल कुमार पाण्डेय, उनकी पत्नी और पुत्री द्वारा अगस्त 2016 से नवंबर 2020 के बीच पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय डाकघर में कुल 19 टीडीआर खाते और 2 आवर्ती जमा खाते खोले गए थे। इन खातों की कुल परिपक्वता राशि 1 करोड़ 97 लाख 42 हजार 705 रुपये थी। आरोप है कि एजेंट के माध्यम से पासबुक उपलब्ध कराई गईं, जिन पर डाकघर की सील और पोस्टमास्टर के हस्ताक्षर दर्ज थे।

बिना अनुमति निकासी का आरोप
परिवाद के अनुसार, पोस्टमास्टर ने एजेंट से मिलीभगत कर खाताधारकों की अनुमति के बिना खातों से राशि आहरण की अनुमति दी। लिखित शिकायत के बावजूद न तो खातों को ब्लॉक किया गया और न ही कोई जानकारी दी गई। डाक विभाग ने बचाव में आंतरिक जांच का हवाला देते हुए जिम्मेदारी एजेंट पर डालने का प्रयास किया।

आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने दस्तावेजों और पासबुक के अवलोकन के बाद स्पष्ट किया कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना न तो पासबुक जारी हो सकती थी और न ही निकासी संभव थी। एजेंट के दोषी पाए जाने के बावजूद विभागीय कार्रवाई न होना भी सेवा में गंभीर कमी माना गया।

भुगतान का आदेश
आयोग ने 18 टीडीआर खातों की परिपक्वता राशि ₹1,91,39,965 पर 20 नवंबर 2023 से 6% वार्षिक साधारण ब्याज, मानसिक पीड़ा के लिए ₹1 लाख और वाद व्यय ₹15 हजार, 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला डाक बचत योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।