जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी का दरबार केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की उम्मीदों और विश्वास का ठिकाना भी है। जब मंदिर की 9 दान पेटियां खोली गईं तो उनमें करीब 19 लाख रुपये नकद प्राप्त हुए। लेकिन इन पैसों से भी ज्यादा ध्यान खींचने वाली थीं वे चिट्ठियां, जिनमें भक्तों ने अपने दिल का दर्द और मां से जुड़ी आस लिखकर रखी थी।
दान पेटियों से निकली चिट्ठियों में किसी ने कांपते हाथों से नौकरी पाने की प्रार्थना की थी, तो किसी ने प्यार को पाने और विवाह की कामना की गुहार लगाई थी। कहीं परीक्षा में सफलता की दुआ थी, तो कहीं बीमार परिजनों के स्वस्थ होने की मन्नत। हर पत्र अपने आप में संघर्ष, भरोसे और उम्मीद की एक जीवंत कहानी बयां कर रहा था।
नौकरी और प्रेम के लिए मां से गुहार
एक युवती ने माता को लिखे पत्र में भरोसे के साथ लिखा—
“मां, आपके दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता। नौकरी के लिए आवेदन किया है, परीक्षा होने वाली है। कृपा करके पास करवा दीजिए और नौकरी लगवा दीजिए।”
इसी पत्र में युवती ने अपने प्रेम का जिक्र करते हुए यह भी लिखा कि वह एक लड़के से प्यार करती है और चाहती है कि दोनों परिवार उनकी शादी के लिए मान जाएं।

एक पत्र में परिवार की पूरी पीड़ा
वहीं दो पन्नों में लिखे एक अन्य पत्र में एक परिवार की पूरी व्यथा झलक रही थी। पत्र में बताया गया कि घर में कमाने वाला केवल एक ही सदस्य है, जिस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। एक रिश्तेदार द्वारा दी गई नौकरी की परीक्षा में सफलता, बीमार परिजनों के स्वस्थ होने और आर्थिक संकट से उबरने की प्रार्थना मां से की गई थी।
बिछड़े प्रेम को मिलाने की फरियाद
एक अन्य भक्त ने बेहद भावुक शब्दों में अपने टूटे प्रेम की कहानी मां तक पहुंचाई। उसने लिखा कि पारिवारिक मजबूरियों के कारण वह अपनी प्रेमिका से बिछड़ गया है, लेकिन आज भी उसी के साथ पूरा जीवन बिताना चाहता है। पत्र में लिखा गया—
“मां, मेरा बिछड़ा हुआ प्यार मुझसे मिला दीजिए।”
दान पेटियों से निकली ये चिट्ठियां इस बात की गवाही देती हैं कि मां दंतेश्वरी का दरबार केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उन लोगों की आखिरी उम्मीद है, जिनकी बातें दुनिया नहीं सुन पाती। यहां सिक्कों की खनक से ज्यादा भरोसे और विश्वास की आवाज़ गूंजती है, और शायद यही वजह है कि भक्त आज भी मां के दरबार तक खाली हाथ नहीं लौटने की आस लेकर पहुंचते हैं।





