दंतेवाड़ा। नक्सलवाद के खात्मे की तय समय सीमा 31 मार्च के दिन दंतेवाड़ा जिले में बड़ी सफलता सामने आई है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 5 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 4 महिला और 1 पुरुष कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
‘पूना मारगेम’ अभियान का असर
‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन कारली में आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा जताई। प्रशासन ने उन्हें शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं देने की बात कही।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों की पहचान
आत्मसमर्पण करने वालों में 5 लाख रुपये की इनामी एसीएम सोमे कड़ती (42 वर्ष) शामिल है, जो भैरमगढ़ एरिया कमेटी से जुड़ी थी। इसके अलावा 1-1 लाख रुपये के इनामी लखमा ओयाम (19 वर्ष), सरिता पोड़ियाम (21 वर्ष), जोगी कलमू (20 वर्ष) और मोटी ओयाम (19 वर्ष) भी शामिल हैं। सभी बीजापुर जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं और लंबे समय से नक्सली संगठन में सक्रिय थे।
हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली सूचना और अन्य खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान INSAS, SLR और BGL जैसे हथियारों सहित करीब 40 घातक हथियार विभिन्न डंप से बरामद किए गए हैं। इसे सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
600 से ज्यादा नक्सली छोड़ चुके हैं हिंसा
पुलिस के अनुसार, ‘पूना मारगेम’ अभियान के प्रभाव से वर्ष 2024 से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल 607 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके अलावा 92 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 54 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान लगातार प्रभावी साबित हो रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस कार्यक्रम में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, सीआरपीएफ के डीआईजी, दंतेवाड़ा कलेक्टर, एसपी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा बलों के जवान मौजूद रहे। सभी ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत करते हुए उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया।
निष्कर्ष:
दंतेवाड़ा में बढ़ते आत्मसमर्पण के मामले इस बात का संकेत हैं कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे शांति, विश्वास और विकास का माहौल बन रहा है।





