September 4, 2026

लाल पानी की बोतल लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ग्रामीण, बोले- आयरन ओर डस्ट ने बर्बाद किए खेत, पीने को साफ पानी भी नहीं

दंतेवाड़ा। दशकों से ‘लाल पानी’ की समस्या झेल रहे आयरन हिल के नीचे बसे गांवों के ग्रामीण शुक्रवार को बोतल में लाल पानी लेकर दंतेवाड़ा कलेक्टोरेट पहुंचे। ग्रामीण अपनी समस्याएं कलेक्टर के सामने रखना चाहते थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाने के कारण उन्हें मायूस होकर वापस गांव लौटना पड़ा।

बीजापुर जिले के गमपुर, डोडी तुमनार, तामोड़ी, पुरंगेल समेत करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीण बचेली और किरंदुल क्षेत्र में एनएमडीसी की खदानों से निकलने वाले लाल पानी की समस्या को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से आयरन ओर डस्ट से प्रदूषित पानी की समस्या झेल रहे हैं।

लाल पानी से बर्बाद हो रहे खेत

ग्रामीणों के मुताबिक खनन क्षेत्र से निकलने वाला आयरन ओर डस्ट बारिश के पानी के साथ बहकर आयरन हिल के नीचे बसे गांवों तक पहुंचता है। इससे खेतों में लाल पानी और खनिजयुक्त गाद जमा हो जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि इसके कारण उनके खेती योग्य खेत बर्बाद हो चुके हैं और कई जगह खेती करना मुश्किल हो गया है।

इस प्रदूषित पानी की चपेट में ग्रामीणों के मवेशी भी आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाल पानी की समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

पीने के साफ पानी का भी संकट

ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी स्वच्छ पेयजल को लेकर है। उनका कहना है कि गांवों में पर्याप्त साफ पानी की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में ग्रामीण नालों के किनारे जुगाड़ से कुएं बनाकर पूरे साल पानी का इस्तेमाल करते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद गांवों में पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

‘विकास के नाम पर मिली लाल पानी की सौगात’

कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन और विकास के नाम पर उन्हें लाल पानी की समस्या मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके खेत खराब हो गए हैं, मवेशी प्रभावित हो रहे हैं और पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने गांवों में सड़क, स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ लाल पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने के कारण ग्रामीण अपनी शिकायत और लाल पानी की बोतल लेकर वापस लौट गए।