March 5, 2026

रायपुर: धान खरीदी बंद होने के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल ने CM विष्णुदेव साय से मांगा स्पष्टीकरण

रायपुर: धान खरीदी 30 जनवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन खरीदी बंद होने के बाद इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि धान नहीं बेच पाने वाले किसानों का क्या होगा और क्या कर्जदार किसानों पर वसूली का दबाव बनाया जाएगा।

भूपेश बघेल ने पत्र में कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। शासन की ओर से लक्ष्य प्राप्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आने वाली सूचनाएँ एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। खरीदी प्रक्रिया बंद होने के बाद किसान, विशेषकर ऋणी किसान, आर्थिक दबाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि इस वर्ष कुल धान खरीदी का लक्ष्य कितना था और इसके विरुद्ध कितने मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई तथा लक्ष्य प्राप्ति का प्रतिशत कितना है। उन्होंने यह भी पूछा कि कुल कितने किसानों ने पंजीयन कराया, कितने किसानों के टोकन काटे गए और कितने किसानों का संपूर्ण धान क्रय किया गया।

साथ ही उन्होंने पूछा कि कितने किसानों के टोकन तकनीकी कारणों या समय-सीमा समाप्त होने के कारण निरस्त हुए, और कितने पंजीकृत किसान धान नहीं बेच पाए। ऋणी किसानों में से कितनों का धान 100% खरीदा गया और जिन किसानों का धान नहीं खरीदा जा सका, वे अपनी अल्पकालिक कृषि ऋण की अदायगी कैसे करेंगे।

पूर्व CM ने यह भी सवाल किया कि अब तक खरीदे गए धान के विरुद्ध कितने किसानों को भुगतान किया गया और कितनी राशि लंबित है। एग्रीस्टैक पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण जिन किसानों का रकबा कम या त्रुटिपूर्ण दिखाया गया और वे धान नहीं बेच पाए, उनकी आर्थिक क्षति का आकलन और भरपाई कैसे की जाएगी।

पत्र के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि अन्नदाता के पसीने की कीमत और उनके स्वाभिमान की रक्षा सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। यदि प्रदेश का कोई किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन उक्त बिंदुओं पर स्पष्टता लाए और किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय ले ताकि कोई भी किसान आर्थिक क्षति या ऋण के बोझ से परेशान न हो।