September 4, 2026

धमतरी में 5 साल के बच्चे ने निगली बैटरी वाली LED लाइट, एंडोस्कोपी से डॉक्टरों ने बचाई जान

धमतरी। छोटे बच्चों की पहुंच से बैटरी, सिक्के, बटन, चुंबक और छोटी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को दूर रखना कितना जरूरी है, इसका चौंकाने वाला मामला धमतरी से सामने आया है। बालोद जिले के गुरुर निवासी 5 वर्षीय गर्वित साहू ने खेल-खेल में बैटरी से चलने वाली छोटी LED लाइट निगल ली। लाइट पेट में जाकर फंस गई। इसके बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों की टीम ने बिना बड़ा चीरा लगाए एंडोस्कोपी के जरिए लाइट को बाहर निकालकर बच्चे की जान बचाई।

खेलते-खेलते निगल ली LED लाइट

जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 10 बजे गर्वित घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसने बैटरी वाली एक छोटी LED लाइट निगल ली। कुछ देर बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन उसे तत्काल बालोद के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे।

प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे को धमतरी रेफर कर दिया।

एंडोस्कोपी से पेट से निकाली लाइट

धमतरी अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे की तत्काल जांच की। जांच में बैटरी वाली LED लाइट पेट में फंसी हुई मिली। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना किसी बड़े चीरे के एंडोस्कोपी के जरिए लाइट निकालने का फैसला किया।

डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए लाइट को पेट से बाहर निकाल दिया। समय पर इलाज मिलने से बच्चे की जान बच गई। उपचार के बाद गर्वित की हालत सामान्य बताई जा रही है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

थोड़ी देर और होती तो बढ़ सकता था खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, बैटरी पेट में लंबे समय तक रहने पर उसके लीक होने का खतरा रहता है। बैटरी से निकलने वाला रसायन शरीर के अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इससे आंतों में जलन या क्षति होने के साथ बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता था।

डॉक्टरों ने पालकों को दी सावधानी बरतने की सलाह

घटना के बाद डॉक्टरों ने अभिभावकों से छोटे बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। बच्चों की पहुंच से बैटरी, सिक्के, बटन, चुंबक, छोटी LED लाइट और अन्य छोटी वस्तुओं को दूर रखना चाहिए।

बच्चों के खेलते समय भी इस बात पर नजर रखना जरूरी है कि वे कोई वस्तु मुंह में न डालें। अगर बच्चा गलती से बैटरी या कोई अन्य वस्तु निगल ले, तो घरेलू उपचार करने या इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।