धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां कोविड काल में ग्रामीणों द्वारा की गई मदद अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। मामला शंकरदाह गांव का है, जहां लॉकडाउन के दौरान एक महिला को रहने के लिए गांव के कांजी हाउस में जगह दी गई थी। अब करीब पांच साल बाद भी महिला ने कथित तौर पर कांजी हाउस खाली नहीं किया है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, कोविड संक्रमण के समय जब देशभर में लॉकडाउन लगा हुआ था और लोगों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित था, उस दौरान संतोषी सिन्हा नाम की महिला शंकरदाह गांव पहुंची थी। महिला ने ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई थी। मानवीय आधार पर ग्रामीणों ने उसे गांव के कांजी हाउस में रहने की अनुमति दे दी थी।
ग्रामीणों का कहना है कि उस समय उन्होंने महिला की मजबूरी को देखते हुए उसे आश्रय दिया था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। कोविड खत्म हुए कई साल बीत चुके हैं, बावजूद इसके महिला कांजी हाउस खाली करने को तैयार नहीं है।
कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीण
परेशान ग्रामीण कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और मामले में हस्तक्षेप की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि कांजी हाउस का उपयोग गांव में मवेशियों को रखने के लिए किया जाता है, लेकिन महिला के वहां रहने के कारण अब उन्हें अपने गोवंशों को रखने के लिए जगह की समस्या हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अनुरोध करने के बाद भी महिला जगह खाली नहीं कर रही है। उनका कहना है कि महिला उल्टा ग्रामीणों पर आरोप लगाने और उन्हें फंसाने की धमकी देती है।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से जल्द कार्रवाई कर कांजी हाउस खाली कराने और समस्या का समाधान करने की मांग की है। अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस विवाद का समाधान किस तरह निकलेगा।





