धमतरी। धमतरी के इतवारी बाजार स्थित एक छोटे से शिवालय की मान्यता और यहां दिखाई देने वाला दृश्य श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बरगद के पेड़ की छांव में स्थित इस शिवालय में रोज पूजा-अर्चना के बाद जब भगवान शिव को भोग लगाया जाता है, तो कुछ ही देर में बड़ी संख्या में नन्हे मूषक वहां पहुंच जाते हैं और भक्तों की मौजूदगी में प्रसाद ग्रहण करते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, यह शिवालय करीब 40 वर्षों से अधिक समय से बरगद के पेड़ के नीचे मौजूद है। आसपास के लोग नियमित रूप से यहां पूजा करने पहुंचते हैं और इस अनोखे दृश्य के साक्षी बनते हैं।
मूषकों से जुड़ी है शिवालय की मान्यता
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यहां मंदिर नहीं था। केवल एक शिवलिंग स्थापित था और लोग उसकी पूजा करते थे। एक दिन अचानक शिवलिंग के आसपास बड़ी संख्या में मूषक दिखाई दिए। इसके बाद लोगों ने मिलकर यहां छोटा सा शिवालय बना दिया।
तब से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया। भक्तों का दावा है कि भगवान शिव को भोग लगाने के बाद सैकड़ों की संख्या में मूषक शिवलिंग के आसपास पहुंचते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप पर पहुंचते हैं मूषक
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जब शिवालय में ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जाता है, तो आसपास मौजूद मूषक शिवलिंग के पास पहुंचने लगते हैं। इसके बाद वे भगवान शिव को चढ़ाए गए भोग-प्रसाद को ग्रहण करते हैं।
भक्त इसे भगवान शिव की विशेष कृपा और आस्था से जुड़ा अद्भुत दृश्य मानते हैं। वहीं, शिवालय में रोज होने वाली यह गतिविधि स्थानीय लोगों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय से कौतूहल और आकर्षण का विषय बनी हुई है।
40 साल से जारी है परंपरा
इतवारी बाजार के इस शिवालय में पूजा और मूषकों के प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह स्थान उनके लिए सिर्फ पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ा एक विशेष स्थल है।
यह परंपरा स्थानीय आस्था का हिस्सा है, जबकि इसके पीछे के व्यवहार को समझने के लिए मूषकों के एकत्र होने के संभावित प्राकृतिक कारणों पर भी विचार किया जा सकता है।





