राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित हिंदू सम्मेलन में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शामिल हुए। यूपी के बांदा में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू समाज से एकजुटता का आह्वान करते हुए जातिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाने पर जोर दिया।
अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “जिस दिन तिरंगे में चांद आ गया, उस दिन न शर्मा बचेंगे, न वर्मा बचेंगे, न क्षत्रिय बचेंगे और न ही किसी अन्य नाम वाले बचेंगे। उस दिन कोई भी हिंदू सुरक्षित नहीं रहेगा।” उन्होंने कहा कि इसका सीधा अर्थ है कि अगर समाज बंटा रहा तो सभी को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आज देश को कास्टवाद नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की जरूरत है। अगर हिंदू समाज जातियों में बंटा रहेगा तो उसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जाति की दीवारें गिराकर राष्ट्र और धर्म की एकता को मजबूत करें।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि इस दौर में वही व्यक्ति और समाज सफल होता है जो एकजुट रहता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में भले ही कई फिरके हों, लेकिन मजहब के मुद्दे पर वे एक रहते हैं, जबकि हिंदू समाज अब भी जातियों में बंटा हुआ है।
उन्होंने देश के कुछ राज्यों में हिंदुओं की घटती आबादी का जिक्र करते हुए चिंता जताई और कहा कि समाज को अपने भविष्य को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। साथ ही युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पहचान जाति से नहीं बल्कि हिंदू से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक हिंदू समाज संगठित नहीं होगा, तब तक उसकी सुरक्षा और मजबूती संभव नहीं है।
गौरतलब है कि इन दिनों बांदा में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा भी चल रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।





