March 5, 2026

छत्तीसगढ़ में डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था से किसानों को मिला सम्मान और भरोसा, CM विष्णुदेव साय का सुशासन मॉडल बना मिसाल

रायपुर। धान का कटोरा के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में धान केवल उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत, परंपरा, संस्कृति और आजीविका के साथ गहराई से जुड़ा है। राज्य का किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक-आर्थिक रीढ़ भी है। जब शासन की कोई नीति किसान को केंद्र में रखकर बनती है, तो उसका प्रभाव केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राज्य की अर्थव्यवस्था तक फैलता है।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह किसानों के भरोसे, सम्मान और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और संवेदनशील नेतृत्व के कारण यह व्यवस्था जमीन पर प्रभावी रूप से उतरी।

सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की नीति और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक की सीमा ने किसानों को उनके श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित किया। इससे पहले किसानों को अपनी फसल का सही मूल्य पाने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था। अब नई व्यवस्था से न केवल मूल्य सुनिश्चित हुआ है, बल्कि भुगतान भी दो दिनों के भीतर सीधे बैंक खातों में होने लगा है।

डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उपार्जन केंद्रों पर प्रत्येक चरण पारदर्शी और सुव्यवस्थित बना है। किसानों को नाप तौल में किसी गड़बड़ी का डर नहीं रहा और हरेक स्तर पर डेटा की वास्तविक समय में एंट्री होने से भ्रष्टाचार की संभावनाएं न्यूनतम हो गई हैं। मुख्यमंत्री के सक्रिय नेतृत्व और जिला प्रशासन की तत्परता ने यह सुनिश्चित किया कि धान खरीदी किसी बोझ या परेशानी का कारण न बने, बल्कि किसानों के लिए सम्मानजनक और सहज प्रक्रिया बने।

इस व्यवस्था से 25 लाख से अधिक किसानों को सीधे लाभ मिला है और राज्य में 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि ग्रामीण बाजारों, स्थानीय व्यापार और कुटीर उद्योग को भी मजबूती दे रहा है। किसानों का भरोसा और आत्मसम्मान बढ़ने से पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था सशक्त हो रही है।

छत्तीसगढ़ में डिजिटल धान खरीदी अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि किसानों के लिए विश्वास और समृद्धि का उत्सव बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य ने किसान हितैषी सुशासन और सु-व्यवस्था का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।