दर्री से परसाभाटा सड़क निर्माण में DMF फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने।
पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ननकीराम कंवर द्वारा डीएमएफ (DMF) फंड में गड़बड़ी के आरोपों के बाद मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। ननकीराम कंवर के पत्र पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकासशील को पत्र भेजकर मामले से जुड़े तथ्यों पर जवाब मांगा है। साथ ही आवेदक को भी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शिकायत में उल्लेखित बिंदुओं पर राज्य शासन से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि डीएमएफ फंड के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता है या नहीं, इसकी जांच की जा सके।
🔎 क्या है पूरा मामला?
दरअसल, ननकीराम कंवर ने शिकायत में आरोप लगाया था कि दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा बालको तक सड़क निर्माण के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत द्वारा डीएमएफ फंड से करीब 26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
उनका कहना है कि यह सड़क बालको कंपनी से जुड़ी है और इसका निर्माण या मरम्मत बालको के CSR फंड से होना चाहिए था, न कि जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के पैसे से। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र सरकार में शिकायत होने की जानकारी मिलते ही तत्कालीन कलेक्टर ने ट्रांसफर से पहले आनन-फानन में लोक निर्माण विभाग से टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी थी।
🗣️ राजनीति भी हुई तेज
इस पूरे मामले पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
👉 कांग्रेस नेता अमरजीत भगत का हमला
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि बीजेपी अपने बुजुर्ग नेताओं को महत्व नहीं देती।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा,
“बीजेपी बुजुर्गों को म्यूजियम में रख देती है। ननकीराम कंवर को समझ लेना चाहिए कि भाजपा अब उनकी नहीं रही।”
👉 BJP विधायक पुरंदर मिश्रा का पलटवार
वहीं बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा,
“ननकीराम कंवर वरिष्ठ नेता हैं और भ्रष्टाचार उजागर कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार में हुए DMF घोटालों की शिकायत सामने आई है। हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। हर घोटाले की जांच होगी।”
⚖️ अब आगे क्या?
केंद्र सरकार के पत्र के बाद छत्तीसगढ़ शासन को पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर भेजनी होगी। जांच में यदि डीएमएफ फंड के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।





