मुंबई। फरहान अख्तर की बहुप्रतीक्षित फिल्म Don 3 रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। अभिनेता Ranveer Singh के फिल्म से बाहर होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब फिल्म इंडस्ट्री के बड़े संगठनों तक पहुंच गया है। हाल ही में Federation of Western India Cine Employees ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी असहयोग निर्देश वापस ले लिया, जबकि Producers Guild of India ने फिल्म प्रोजेक्ट्स से आखिरी समय में पीछे हटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रोड्यूसर्स गिल्ड आने वाले दिनों में इस मामले पर एक और बैठक आयोजित कर सकता है। गिल्ड के उपाध्यक्ष मनीष गोस्वामी ने कहा है कि संगठन दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान चाहता है, लेकिन यदि बातचीत से रास्ता नहीं निकलता तो कानूनी विकल्प भी खुला है।
बताया जा रहा है कि आगामी बैठकों में केवल Don 3 विवाद ही नहीं, बल्कि कलाकारों की पेशेवर प्रतिबद्धताओं और निर्माताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े नए दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक फिल्म की प्री-प्रोडक्शन प्रक्रिया के दौरान किए गए अधिकांश भुगतान पहले ही पूरे किए जा चुके थे और निर्माताओं ने इस तरह की घटनाओं से तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब फिल्म की शूटिंग शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले रणवीर सिंह ने कथित तौर पर प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिनेता फिल्म की तैयारियों में लंबे समय से शामिल थे और एक्शन ट्रेनिंग, कॉस्ट्यूम ट्रायल तथा स्क्रिप्ट रीडिंग जैसी प्रक्रियाओं में हिस्सा ले रहे थे।
हालांकि बाद में उन्होंने फिल्म से अलग होने का निर्णय लिया। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अंतिम स्क्रिप्ट को लेकर असंतोष, लंबे समय तक चली डेवलपमेंट प्रक्रिया और बजट में कटौती जैसे कई कारण उनके फैसले के पीछे रहे। बताया जाता है कि फिल्म का अनुमानित बजट 300-350 करोड़ रुपये से घटाकर करीब 150 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने जताई चिंता
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि हाल के वर्षों में कलाकारों, निर्देशकों और तकनीशियनों द्वारा अंतिम समय में प्रोजेक्ट छोड़ने की घटनाएं बढ़ी हैं। ऐसे फैसलों से निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होता है और फिल्म उद्योग से जुड़े सैकड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित होती है।
गिल्ड का कहना है कि पेशेवर प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि फिल्म निर्माण प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और उद्योग में अनिश्चितता की स्थिति न बने।
समाधान की तलाश जारी
इस मामले को लेकर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद मामला FWICE तक पहुंचा था। अब जबकि असहयोग निर्देश वापस ले लिया गया है, इंडस्ट्री की नजर गिल्ड की अगली बैठक और संभावित समझौते पर टिकी हुई है।





