May 18, 2026

डोंगरगढ़ में आस्था का महासागर: ज्योति विसर्जन के लिए थमी रेल, भक्ति में डूबा पूरा शहर

डोंगरगढ़। चैत्र नवरात्र 2026 के समापन पर आस्था नगरी डोंगरगढ़ एक बार फिर भक्ति, परंपरा और अद्भुत आस्था के विराट दृश्य का साक्षी बना। मां बम्लेश्वरी मंदिर से निकली ज्योति विसर्जन शोभायात्रा पूरे शहर से होते हुए ऐतिहासिक महावीर तालाब तक पहुंची, जहां हजारों ज्योति कलशों का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया।

नवरात्र के नौ दिनों तक पूजित ज्योति कलश को सिर पर धारण किए सैकड़ों महिलाएं जैसे ही मंदिर परिसर से निकलीं, पूरे शहर का माहौल भक्ति में सराबोर हो गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देवी गीतों की मधुर स्वर लहरियां और “जय माँ बम्लेश्वरी” के गगनभेदी जयकारों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ती रही। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर और प्रसाद वितरण कर यात्रा का स्वागत किया।

इस भव्य आयोजन का सबसे अद्भुत और ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला, जब शोभायात्रा मुंबई–हावड़ा मुख्य रेल मार्ग को पार करने पहुंची। आम दिनों में जहां ट्रेनों की रफ्तार कभी नहीं रुकती, वहीं इस विशेष अवसर पर आस्था के सम्मान में रेलवे द्वारा मेगा ब्लॉक लगाया गया। दोनों दिशाओं से आने वाली ट्रेनों के पहिए थम गए और कुछ समय के लिए पटरियों पर सन्नाटा छा गया—यह दृश्य आस्था की शक्ति और परंपरा की गहराई को दर्शाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा अंग्रेजों के दौर से चली आ रही है। कहा जाता है कि उस समय खैरागढ़ राजपरिवार ने रेलवे लाइन बिछाने के दौरान यह शर्त रखी थी कि ज्योति विसर्जन के समय ट्रेनों को रोका जाएगा। वर्षों बाद भी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और नियम के साथ निभाई जा रही है।

रेलवे ट्रैक पार करने के बाद शोभायात्रा मां शीतला मंदिर पहुंची, जहां मां बम्लेश्वरी और मां शीतला की ज्योत का प्रतीकात्मक मिलन हुआ। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक और आध्यात्मिक रहा। इसके बाद यात्रा महावीर तालाब पहुंची, जहां भक्तों ने अपनी-अपनी ज्योति कलश को जल में प्रवाहित कर मां से सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

पूरे आयोजन के दौरान “जय माँ बम्लेश्वरी” के जयकारों से डोंगरगढ़ गूंजता रहा। यह ज्योति विसर्जन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, सामाजिक एकता और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है—जहां श्रद्धा के आगे आधुनिक जीवन की रफ्तार भी कुछ पल के लिए ठहर जाती है।