September 4, 2026

डोंगरगढ़ में फिर दिखा तेंदुआ, वीडियो वायरल; जंगलों में वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठे गंभीर सवाल

डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ के प्रज्ञागिरी पहाड़ पर एक बार फिर तेंदुआ दिखाई देने से इलाके में हलचल मच गई है। तेंदुए का करीब 1 मिनट 32 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद जहां लोगों में वन्यजीव को लेकर उत्सुकता बढ़ी है, वहीं तेंदुए की लोकेशन सार्वजनिक होने से उसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

दशकों से तेंदुओं की मौजूदगी, फिर भी संरक्षण पर सवाल

डोंगरगढ़ से खैरागढ़ तक फैले जंगलों में पिछले कई दशकों से तेंदुओं की मौजूदगी के प्रमाण मिलते रहे हैं। इस क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष और हमले की कुछ घटनाएं भी सामने आई हैं। वहीं तेंदुओं के अवैध शिकार के मामले भी चिंता का विषय रहे हैं।

कई मामलों में तेंदुए की खाल और नाखून के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तेंदुए के शव मिलने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि समृद्ध जैव विविधता वाले इन जंगलों को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अब तक पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षण क्यों नहीं मिल सका।

लोकेशन वायरल होने से शिकारियों का खतरा

तेंदुआ दिखाई देने के बाद उसकी तस्वीर और लोकेशन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाती है। इससे लोग उसे देखने और वीडियो बनाने के लिए जंगल या पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचने लगते हैं।

लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए यह चिंता का विषय है। तेंदुए की सार्वजनिक लोकेशन शिकारियों तक भी पहुंच सकती है, जिससे वन्यजीव के लिए खतरा बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में वन्यजीव की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लोकेशन साझा करने से बचना जरूरी माना जाता है।

कैमरा ट्रैप और पेट्रोलिंग मजबूत करने की जरूरत

डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगलों में तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कैमरा ट्रैप, नियमित पेट्रोलिंग और एंटी-पोचिंग निगरानी को मजबूत करने की जरूरत है।

साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या वन विभाग के पास संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए पर्याप्त संसाधन और व्यवस्था है। तेंदुए की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में पर्यटन, ट्रैकिंग और नाइट स्टे जैसी गतिविधियों को भी वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियंत्रित करने की जरूरत है।

सिर्फ तेंदुआ दिखने पर सक्रियता काफी नहीं

डोंगरगढ़ में जब भी तेंदुआ दिखाई देता है, वन विभाग और प्रशासन सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई तेंदुआ दिखाई देने तक ही सीमित रहेगी, या उसके प्राकृतिक रहवास और सुरक्षित कॉरिडोर को बचाने के लिए स्थायी योजना भी बनाई जाएगी।

दशकों से तेंदुओं की मौजूदगी, शिकार की घटनाओं और वन्यजीवों के शव मिलने के बावजूद यदि व्यापक संरक्षण योजना जमीन पर नहीं आती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

मुद्दा सिर्फ प्रज्ञागिरी पर दिखाई दिए एक तेंदुए का नहीं है, बल्कि यह है कि डोंगरगढ़-खैरागढ़ के जंगलों में वन्यजीवों का प्राकृतिक घर आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना सुरक्षित रहेगा।