डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ की आस्था की प्रमुख धुरी माने जाने वाले मां बम्लेश्वरी मंदिर में इस बार नवरात्र महोत्सव एक नई पहचान के साथ सामने आया। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील पुलिसिंग का भी सशक्त उदाहरण बन गया।
पिछले दस दिनों तक लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच राजनांदगांव पुलिस ने लगातार चौबीसों घंटे ड्यूटी निभाई। मंदिर परिसर, पहाड़ी मार्ग और मेला स्थल पर सतर्क तैनाती के चलते पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित बनी रही। रामनवमी के दिन माता की ज्योति विसर्जन के साथ महोत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस बार नवरात्र का सबसे खास और ऐतिहासिक क्षण तब सामने आया, जब पहली बार जिला पुलिस बल ने पुलिस बैंड के साथ माता बम्लेश्वरी की आरती की। जैसे ही बैंड अपने साजो-सामान के साथ मंदिर परिसर पहुंचा, श्रद्धालुओं का ध्यान स्वतः उसकी ओर खिंच गया। सुमधुर धुनों ने पूरे वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। यह दृश्य आस्था और अनुशासन के अनोखे मेल के रूप में उभरा, जिसने हर किसी को प्रभावित किया।
पूरे नवरात्र के दौरान चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था ने श्रद्धालुओं में भरोसा पैदा किया। भीड़ नियंत्रण से लेकर मेला प्रबंधन तक हर स्तर पर पुलिस की सक्रियता साफ दिखाई दी। यही वजह रही कि इतने बड़े आयोजन के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था या अप्रिय घटना की स्थिति नहीं बनी और माहौल शांत, सुरक्षित और भक्तिमय बना रहा।
पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के नेतृत्व में तैयार रणनीति ने यह साबित किया कि प्रभावी प्रबंधन और मानवीय दृष्टिकोण के साथ किसी भी बड़े आयोजन को सफल बनाया जा सकता है। ड्यूटी संपन्न होने के बाद पुलिस बल ने भी माता के दरबार में पहुंचकर आरती-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।
डोंगरगढ़ का यह नवरात्र महोत्सव एक स्पष्ट संदेश देकर गया—जब सुरक्षा और सेवा साथ चलती हैं, तब आस्था का उत्सव अपने वास्तविक और भव्य स्वरूप में सामने आता है।





