July 31, 2026

Bilaspur High Court: डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ भूमि अधिग्रहण मामले में हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को शिकायत पर सुनवाई के निर्देश

बिलासपुर। डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण और भूमि अधिग्रहण विवाद मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राजनांदगांव कलेक्टर को याचिकाकर्ता की शिकायत पर सुनवाई का अवसर देते हुए उसका परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

मामला डोंगरगढ़ के बुधवारीपारा वार्ड निवासी फहीम अख्तर की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी कृषि भूमि को बिना सहमति प्रस्तावित परिक्रमा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बिना सहमति भूमि अधिग्रहण का आरोप

याचिकाकर्ता का कहना है कि ग्राम छीरपानी स्थित उनकी कृषि भूमि के अधिग्रहण के लिए न तो उनकी लिखित या मौखिक सहमति ली गई और न ही वे अपनी जमीन बेचना चाहते हैं। उनका यह भी कहना है कि शासन द्वारा बाजार मूल्य से कम दर पर भूमि खरीदने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया है।

सरकारी जमीन उपलब्ध होने का दावा

याचिकाकर्ता ने कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में कहा था कि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, ऐसे में निजी भूमि अधिग्रहित करने की आवश्यकता नहीं है। उनका दावा है कि यदि उपलब्ध सरकारी भूमि से सड़क बनाई जाए तो शासन को भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से भी बचाया जा सकता है।

46 किसानों की जमीन अधिग्रहण पर विवाद

करीब 55.45 करोड़ रुपये की लागत वाली डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना शुरू से ही विवादों में है। परियोजना के तहत लगभग 8 किलोमीटर फोरलेन मार्ग के निर्माण के लिए 46 किसानों की 6.386 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित करने और करीब 6.33 करोड़ रुपये मुआवजा देने का प्रस्ताव है।

प्रभावित किसानों का आरोप है कि उन्हें परियोजना का स्वीकृत रूट मैप, डीपीआर और भूमि चयन का तकनीकी आधार उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उनकी आपत्तियों का संतोषजनक समाधान भी नहीं हुआ।

कांग्रेस भी कर चुकी है विरोध

इस परियोजना का कांग्रेस भी विरोध कर चुकी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर परिक्रमा पथ परियोजना निरस्त करने, डोंगरगढ़ बाईपास निर्माण को प्राथमिकता देने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामले में कलेक्टर स्तर पर सुनवाई और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।