June 9, 2026

काले पानी से बर्बाद हो रही खेती! नगरनार-कस्तूरी के किसानों ने NMDC पर लगाए गंभीर आरोप

जगदलपुर। बस्तर के नगरनार और कस्तूरी पंचायत के किसानों ने एनएमडीसी और औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले आयरन युक्त काले पानी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि वर्षों से खेतों में छोड़े जा रहे इस पानी के कारण 350 एकड़ से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है और खेती की उत्पादकता में भारी गिरावट आई है।

मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट में मिले चिंताजनक संकेत

सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी, जगदलपुर द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार कस्तूरी गांव के पांच किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में मिट्टी का pH और EC स्तर सामान्य सीमा में पाया गया, लेकिन कई खेतों में पोटाश, आयरन और तांबे की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी अधिक दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक उपलब्ध पोटाश 393 से 551 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पाया गया, जबकि सामान्य उच्च सीमा 280 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मानी जाती है। वहीं आयरन की मात्रा 37 से 71 पीपीएम तक दर्ज हुई, जबकि सामान्य उच्च सीमा 10 पीपीएम है। तांबे की मात्रा भी 3.7 से 13 पीपीएम तक पाई गई, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है।

80 प्रतिशत तक घटी उपजाऊ क्षमता: किसान

किसानों का दावा है कि जिन खेतों में पहले प्रति एकड़ 20 से 22 क्विंटल धान का उत्पादन होता था, वहां अब मुश्किल से 3 से 4 क्विंटल धान की पैदावार हो रही है। उनका आरोप है कि भूमि की उपजाऊ शक्ति लगभग 80 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है, जिससे कई किसान आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं।

प्रशासन से वर्षों से लगा रहे गुहार

किसानों के अनुसार वे कई वर्षों से कलेक्टर, विधायक, सांसद और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर समस्या से अवगत करा रहे हैं। उनकी मांग है कि औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले काले पानी को खेतों में जाने से रोका जाए और उसके निस्तारण की उचित व्यवस्था की जाए।

जांच के आश्वासन के बाद भी नहीं पहुंची टीम

किसानों का कहना है कि हाल ही में बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने प्रभावित क्षेत्र का मामला संज्ञान में लेकर जांच टीम गठित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

किसानों ने रखीं दो प्रमुख मांगें

प्रभावित किसानों ने प्रशासन के सामने दो स्पष्ट मांगें रखी हैं—

  • आयरन युक्त काले पानी का खेतों में प्रवाह तत्काल बंद किया जाए।
  • यदि समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है तो प्रभावित भूमि का अधिग्रहण कर किसानों के परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

इंद्रावती नदी पर भी जताई चिंता

किसानों ने आशंका जताई है कि यही प्रदूषित पानी नालों के माध्यम से बहकर अंततः इंद्रावती नदी तक पहुंच रहा है, जो जगदलपुर शहर के लिए प्रमुख जल स्रोत है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता की स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।

अब किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई और प्रस्तावित जांच पर टिकी है। उनका कहना है कि यह केवल खेती का मुद्दा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के भविष्य और आजीविका से जुड़ा सवाल है।