March 4, 2026

एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र

आदिवासी महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिल रहा व्यापक बाजार

रायपुर, 09 फरवरी 2026

प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जिला धमतरी के ग्राम दुगली में स्थापित वन धन विकास केंद्र (VDVK) आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक आय उपलब्ध करा रहा है।

दुगली वन धन विकास केंद्र स्व-सहायता समूहों के संघ के रूप में कार्य करता है। एक प्रमुख समूह संचालन की जिम्मेदारी संभालता है जबकि अन्य समूह आवश्यकता और ऑर्डर के अनुसार उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है।

25 प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार

केंद्र में वर्तमान में लगभग 25 प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हर्बल पाउडर, स्वास्थ्य पेय और अन्य आयुर्वेदिक उत्पाद शामिल हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किए जाते हैं तथा आयुष और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं।

एलोवेरा उत्पादों की बढ़ती मांग

विशेष रूप से एलोवेरा से बने साबुन, क्रीम, बॉडी वॉश और हैंडवॉश जैसे पर्सनल केयर उत्पादों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इनकी बढ़ती मांग से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी सहायता, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके चलते उत्पाद राज्य स्तरीय मेलों, विभागीय नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार तक पहुँच रहे हैं।

74 लाख से अधिक का वार्षिक कारोबार

वित्तीय वर्ष 2024-25 में दुगली वन धन विकास केंद्र का वार्षिक कारोबार 74 लाख 62 हजार 156 रुपये दर्ज किया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है।

‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद अब विभिन्न मार्ट, चयनित आउटलेट्स और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं तथा आयुष विभाग और पर्यटन मंडल को नियमित आपूर्ति की जा रही है।

आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी

दुगली वन धन विकास केंद्र आज केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है। यह साबित करता है कि शासकीय योजनाओं और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।