September 4, 2026

दुर्ग-भिलाई में आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, 3 साल में 1566 लोगों ने दी जान

भिलाईनगर। दुर्ग जिले में आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले तीन वर्षों और वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में कुल 1566 लोगों ने आत्महत्या की है। यानी औसतन हर साल करीब 522 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस साल जून तक ही 302 मामले सामने आ चुके हैं।

2025 में सबसे ज्यादा मामले

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2023 में जिले में 506, वर्ष 2024 में 508 और वर्ष 2025 में 552 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं 2026 के पहले छह महीनों में ही 302 मामले दर्ज हो चुके हैं।

अगर यही रफ्तार जारी रही तो इस साल का आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।

70 फीसदी मामलों में वजह बनी पहेली

आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि करीब 1244 मामलों में आत्महत्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी। वर्ष 2023 में 311, 2024 में 415, 2025 में 361 और जून 2026 तक 190 मामलों में कारण अज्ञात रहा।

जिन मामलों में वजह सामने आई, उनमें घरेलू विवाद सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। 42 महीनों में कुल 225 लोगों ने पारिवारिक कलह और घरेलू तनाव के चलते आत्महत्या की।

नशाखोरी और आर्थिक तंगी भी बड़ी वजह

पुलिस आंकड़ों के अनुसार, नशाखोरी के चलते 2023 से जून 2026 तक 106 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 2023 में 29, 2024 में 12, 2025 में 29 और 2026 के छह महीनों में 36 मामले शामिल हैं।

वहीं आर्थिक तंगी के कारण इसी अवधि में 72 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इनमें 2023 में 24, 2024 में 13, 2025 में 31 और 2026 में 5 मामले दर्ज हुए।

मोबाइल को लेकर डांट भी बन रही वजह

आंकड़ों में बच्चों और युवाओं से जुड़ा एक नया चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। मोबाइल देखने से रोकने या पढ़ाई को लेकर डांटने के बाद आत्महत्या के मामले सामने आए हैं।

2023, 2024 और 2025 में ऐसे एक-एक मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 5 मामले सामने आ चुके हैं। यह परिवारों के लिए बच्चों के साथ संवाद और काउंसलिंग की जरूरत को लेकर गंभीर संकेत है।

प्रेम प्रसंग के मामले सबसे कम

पुलिस के आंकड़ों में प्रेम प्रसंग से जुड़े आत्महत्या के मामले अपेक्षाकृत कम हैं। वर्ष 2023 से जून 2026 के बीच कुल 7 मामले प्रेम प्रसंग से संबंधित दर्ज हुए हैं।

आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या के पीछे घरेलू तनाव, नशाखोरी, आर्थिक परेशानियां और मानसिक अशांति जैसे कई कारण सामने आ रहे हैं। ऐसे में परिवार, समाज और प्रशासन के स्तर पर समय रहते संवाद, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।