दुर्ग। 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में दुर्ग जिले का अपेक्षित परिणाम नहीं आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा की और संबंधित प्राचार्यों से स्पष्टीकरण मांगा है।
प्राचार्यों ने बताई नई पोस्टिंग की समस्या
स्पष्टीकरण में कई प्राचार्यों ने बताया कि उनकी नई पोस्टिंग ऐसे समय में हुई, जब स्कूलों में परीक्षा का माहौल था। ऐसे में उन्हें पढ़ाई और परीक्षा प्रबंधन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया, जिसका असर परीक्षा परिणाम पर पड़ा।
प्रमोशन और युक्तियुक्तकरण से प्रभावित हुई पढ़ाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में 194 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया गया था। इनमें से अधिकांश व्याख्याता स्कूलों में अध्यापन कार्य कर रहे थे। प्रमोशन प्रक्रिया के चलते सितंबर माह से ही शिक्षकों का ध्यान प्रशासनिक जिम्मेदारियों की ओर बढ़ने लगा था, जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।
इसके अलावा करीब 56 व्याख्याता युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गए। कुल मिलाकर लगभग 250 व्याख्याताओं के स्कूलों से हटने से शिक्षण व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा।
पूरे सत्र में चली युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया
पिछले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया चलती रही। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में विभागीय अमला लंबे समय तक उलझा रहा, जिससे नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
गैर-शैक्षणिक कार्य भी बने वजह
विभागीय सूत्रों के मुताबिक शिक्षकों को पूरे सत्र के दौरान प्रशिक्षण और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में भी लगाया गया। इनमें एसआईआर जैसे कार्य प्रमुख रहे। लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों को विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान देने का अवसर नहीं मिल पाया।
अब शिक्षा विभाग जिले में कमजोर परिणाम के कारणों की विस्तृत समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।





